जयपुर | राजस्थान की राजनीति में इन दिनों 'इंतजारशास्त्र' शब्द काफी चर्चाओं में है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की वर्तमान भजनलाल सरकार के खिलाफ एक नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपनी इस सोशल मीडिया सीरीज के माध्यम से सरकार की कार्यशैली पर कड़े प्रहार किए हैं। गहलोत का आरोप है कि कांग्रेस शासन के दौरान शुरू किए गए जनकल्याणकारी प्रोजेक्ट्स को वर्तमान सरकार राजनीतिक द्वेष के कारण रोक रही है। गहलोत की यह सीरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काफी वायरल हो रही है और जनता के बीच विकास कार्यों की चर्चा तेज कर दी है।
इंतजारशास्त्र का बढ़ता राजनीतिक दायरा
अशोक गहलोत ने अब तक इस सीरीज के कुल छह अध्याय जारी किए हैं। हर अध्याय में एक विशिष्ट प्रोजेक्ट की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। गहलोत का कहना है कि यह केवल ईंट और पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि जनता की उम्मीदें हैं। भाजपा सरकार इन प्रोजेक्ट्स को लटकाकर प्रदेश के विकास को पीछे धकेल रही है। जनता अब इस 'इंतजार' से थक चुकी है और जवाब चाहती है। इस सीरीज ने राजस्थान की राजनीति में एक नया नैरेटिव स्थापित कर दिया है।
युवाओं के भविष्य पर प्रहार: अध्याय 1
सीरीज के पहले अध्याय में गहलोत ने महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इसे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की तर्ज पर बनाया गया था। जयपुर के जेएलएन मार्ग पर स्थित इस संस्थान पर 233 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। साल 2024 से यह संस्थान पूरी तरह बनकर तैयार खड़ा है। लेकिन भाजपा सरकार इसे शुरू करने में हिचकिचा रही है। गहलोत ने इसे शिक्षा के मंदिर पर राजनीति करार दिया है और इसे अविलंब शुरू करने की मांग की है।
स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी रुकावट: अध्याय 2
दूसरे अध्याय में सवाई मानसिंह अस्पताल के आईपीडी टावर का जिक्र किया गया है। यह 1200 बेड का टावर मरीजों को बड़ी राहत देने के लिए डिजाइन किया गया था। गहलोत के अनुसार, भाजपा सरकार के कार्यकाल में यहां एक भी नई मंजिल नहीं जोड़ी गई है। प्रोजेक्ट की लागत 400 करोड़ से बढ़कर 764 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। काम ठप होने से मरीजों को आधुनिक सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। क्या यह देरी केवल इसलिए है क्योंकि यह कांग्रेस का प्रोजेक्ट था? गहलोत ने इसे सरकारी लापरवाही का बड़ा उदाहरण बताया है।
महिला चिकित्सालय की अनदेखी: अध्याय 3
तीसरे अध्याय में सांगानेरी गेट स्थित महिला चिकित्सालय के आईपीडी टावर का मामला उठाया गया। फरवरी 2023 में 117 करोड़ रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी। गहलोत ने कहा कि इसे अगस्त 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए था। वर्तमान सरकार की सुस्ती के कारण यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि क्या महिलाओं का स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता में नहीं है? माताएं और बहनें कब तक इस आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतजार करेंगी? यह संवेदनहीनता प्रदेश की महिलाओं के साथ अन्याय है।
सैटेलाइट अस्पतालों पर गहराया संकट: अध्याय 4
चौथे अध्याय में जयपुर के चारों कोनों में प्रस्तावित सैटेलाइट अस्पतालों की बात की गई है। गहलोत ने आरोप लगाया कि कानोता और अचरोल के अस्पतालों का काम रद्द कर दिया गया है। यह कदम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। दुर्घटना के समय 'गोल्डन आवर' में इलाज मिलना जीवन बचाने के लिए जरूरी होता है। इन अस्पतालों के न बनने से ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों की जनता को भारी परेशानी होगी। सरकार को इस पर तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए कि आखिर ये प्रोजेक्ट क्यों रोके गए हैं।
सिविल लाइंस आरओबी का ज्वलंत मुद्दा: अध्याय 5
पांचवें अध्याय में मुख्यमंत्री आवास के पास स्थित सिविल लाइंस ओवरब्रिज का मुद्दा गर्माया। गहलोत ने कहा कि जब सीएम आवास के 100 मीटर दायरे में विकास की यह स्थिति है, तो बाकी प्रदेश का क्या होगा? यह प्रोजेक्ट 2021 में जनता को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए शुरू हुआ था। अब 2026 आ गया है, लेकिन काम अधूरा रहने से यह क्षेत्र एक्सीडेंट जोन बन गया है। राजनीतिक द्वेष के कारण जनता की सुविधा को दांव पर लगाना उचित नहीं है। क्या जनता की सुविधा से ऊपर राजनीति को रखा जा रहा है?
चौप क्रिकेट स्टेडियम और खिलाड़ियों के सपने: अध्याय 6
छठे अध्याय में गहलोत ने खेल जगत से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर हमला बोला। जयपुर के चौप में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम निर्माणाधीन है। गहलोत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस स्टेडियम का काम 2024 तक पूरा होना था। 36 महीने बीत जाने के बाद भी करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद काम अधूरा है। खिलाड़ियों के सपनों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करें। यह स्टेडियम राजस्थान का गौरव बनने वाला था, जिसे अब ग्रहण लग गया है।
भाजपा का पलटवार और राजनीतिक बहस
गहलोत के इन आरोपों पर भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। मंत्री पटेल ने इसे केवल भ्रम फैलाने की कोशिश करार दिया है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि उनकी सरकार 'कर्मशास्त्र' में विश्वास रखती है। कांग्रेस ने केवल शिलान्यास किए थे, लेकिन बजट और योजना में कई तकनीकी कमियां छोड़ी थीं। भाजपा का दावा है कि वे सभी अटके हुए प्रोजेक्ट्स को सुव्यवस्थित तरीके से पूरा करेंगे। हालांकि, गहलोत की यह सीरीज जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और विपक्ष को एक मजबूत मुद्दा दे दिया है।
निष्कर्ष: विकास बनाम राजनीति की जंग
राजस्थान की राजनीति में विकास कार्यों को लेकर यह खींचतान नई नहीं है। लेकिन 'इंतजारशास्त्र' जैसी सीरीज के माध्यम से गहलोत ने एक नया नैरेटिव सेट कर दिया है। जनता अब इन प्रोजेक्ट्स की जमीनी हकीकत को और करीब से देख रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन सवालों का जवाब काम के जरिए देती है या केवल बयानों तक सीमित रहती है। विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम आदमी की जेब और सुविधाओं पर पड़ता है। राजस्थान की जनता अब केवल वादे नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहती है।