नई दिल्ली | भारत में जनगणना की तैयारी अब युद्ध स्तर पर शुरू हो चुकी है। गृह मंत्रालय ने इसकी पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। इसमें तकनीक और सामाजिक बदलावों का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना 2026 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू होगा। इसमें कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। यह चरण 'हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना' के नाम से जाना जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य घरों की स्थिति जानना है।
लिव-इन कपल्स के लिए बड़ा बदलाव
इस जनगणना की सबसे बड़ी और चर्चित खबर लिव-इन कपल्स से जुड़ी है। अब जनगणना के दौरान उन्हें भी शादीशुदा का दर्जा दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए एक विशेष शर्त रखी गई है। कपल को खुद यह स्वीकार करना होगा कि उनका रिश्ता स्थायी है।
यह कदम बदलते सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखकर उठाया गया है। इससे सामाजिक डेटा में अधिक सटीकता आएगी। सरकार यह समझना चाहती है कि समाज में रहने के तौर-तरीकों में क्या बदलाव आए हैं। यह पहली बार है जब जनगणना में ऐसे रिश्तों को आधिकारिक स्थान मिला है।
पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने बताया कि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। अब कागजों का भारी-भरकम बोझ पूरी तरह खत्म हो जाएगा। करीब 30 लाख सरकारी कर्मचारी मोबाइल एप का इस्तेमाल करेंगे। यह एप एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर काम करेगा।
जनगणना के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है। लोग खुद भी इस पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी भर सकेंगे। इसे 'सेल्फ एन्यूमरेशन' का नाम दिया गया है। पोर्टल पर लोगों की मदद के लिए अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) भी दिए गए हैं।
आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना
एक और बड़ा फैसला जाति आधारित जनगणना को लेकर लिया गया है। आजादी के बाद पहली बार देश में जाति की गिनती होने जा रही है। इससे पहले 1931 में अंग्रेजों के समय जाति आधारित जनगणना हुई थी। अब इसे आधुनिक और डिजिटल तरीके से अंजाम दिया जाएगा।
विपक्ष लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। अब मोदी सरकार ने इसे मुख्य जनगणना का हिस्सा बना दिया है। इससे विभिन्न समुदायों की सही आबादी का पता चल सकेगा। यह डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मैप पर हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’
इस बार हर घर की जियो-टैगिंग की जाएगी। इसे मैप पर 'डिजी डॉट' के नाम से जाना जाएगा। इसके पांच बड़े फायदे सरकार ने बताए हैं। पहला फायदा आपदा प्रबंधन में होगा। बाढ़ या भूकंप के समय सटीक मदद पहुंचाई जा सकेगी।
मैप से पता चलेगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। इससे बचाव कार्य के लिए जरूरी नाव, हेलिकॉप्टर और फूड पैकेट की व्यवस्था आसान होगी। सुदूर इलाकों में भी राहत सामग्री पहुंचाना अब चुनौतीपूर्ण नहीं रहेगा। डिजिटल मैप से हर घर की लोकेशन ट्रैक होगी।
परिसीमन और शहरी प्लानिंग में आसानी
डिजी डॉट से राजनीतिक परिसीमन में भी बड़ी सुविधा होगी। विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण अब अधिक वैज्ञानिक तरीके से होगा। समुदायों का बंटवारा इस तरह नहीं होगा कि एक मोहल्ला दूसरे क्षेत्र में चला जाए। यह लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।
शहरी प्लानिंग में भी यह डेटा क्रांतिकारी साबित होने वाला है। स्कूलों, अस्पतालों और पार्कों के लिए सही जगह का चुनाव किया जा सकेगा। यदि किसी बस्ती में बच्चों की संख्या अधिक होगी, तो वहां पार्क प्राथमिकता से बनाए जाएंगे। यह स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी मददगार होगा।
वोटर लिस्ट से हटेंगे फर्जी नाम
डिजिटल डेटा और आधार के जुड़ने से वोटर लिस्ट अधिक पारदर्शी होगी। डुप्लीकेट नामों को हटाना अब बहुत आसान हो जाएगा। जब कोई नागरिक किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा, तो उसकी पहचान पुख्ता होगी। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
जनगणना से पलायन दर का भी सटीक डेटा मिलेगा। सरकार जान पाएगी कि लोग किन क्षेत्रों से पलायन कर रहे हैं। इससे शहरों पर बढ़ते आबादी के दबाव को कम करने की योजना बनाई जा सकेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
संदर्भ तिथि और समय का महत्व
जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने संदर्भ तिथि के महत्व को समझाया है। यह तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात तय की गई है। इसका मतलब है कि जनगणना के परिणाम उस समय की स्थिति को दर्शाएंगे। इसीलिए इसे आधिकारिक तौर पर जनगणना 2027 कहा जा रहा है।
30 लाख कर्मचारियों की फौज इस विशाल कार्य को संपन्न करेगी। उन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। रीयल-टाइम डेटा ट्रांसफर से परिणाम पिछली बार की तुलना में बहुत जल्दी आएंगे। भारत अब दुनिया के उन देशों में शामिल होगा जिनके पास पूरी तरह डिजिटल जनसंख्या डेटा है।