नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से गोवा और महाराष्ट्र के लिए ₹592 करोड़ से अधिक का भारी-भरकम अनुदान जारी किया है। यह आवंटन 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किया गया है।
यह वित्तीय सहायता पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) और ग्रामीण स्थानीय निकायों को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदान की गई है। सरकार का लक्ष्य जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकास को और अधिक प्रभावी बनाना है।
महाराष्ट्र के लिए करोड़ों का फंड
महाराष्ट्र के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त का रुका हुआ हिस्सा ₹79.82 करोड़ जारी किया गया है। यह राशि 12 जिला पंचायतों, 125 प्रखंड पंचायतों और 27 पात्र ग्राम पंचायतों को मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, इसी वित्त वर्ष की दूसरी किस्त के रूप में ₹221.82 करोड़ का रुका हुआ हिस्सा भी स्वीकृत किया गया है। इसका लाभ राज्य की 5249 ग्राम पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों को प्राप्त होगा।
बंधित अनुदान का विवरण
केंद्र सरकार ने केवल अप्रतिबंधित ही नहीं, बल्कि बंधित अनुदान भी जारी किए हैं। महाराष्ट्र को वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बंधित अनुदान की पहली किस्त के रूप में ₹159.32 करोड़ की राशि दी गई है।
वहीं, दूसरी किस्त के तहत ₹118.69 करोड़ का आवंटन किया गया है। यह राशि विशेष रूप से उन विकास कार्यों के लिए आरक्षित है, जो ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए आवश्यक हैं।
गोवा की पंचायतों को मिली मजबूती
गोवा के लिए भी केंद्र ने उदारता दिखाते हुए वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अप्रतिबंधित अनुदान की पहली किस्त जारी की है। राज्य को ₹12.40 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है।
इस आवंटन के दायरे में गोवा की 2 जिला पंचायतें और सभी 191 पात्र ग्राम पंचायतें आएंगी। इससे छोटे राज्यों में भी विकास की गति को समान रूप से बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अनुदानों का वर्गीकरण और उपयोग
अप्रतिबंधित अनुदान (Untied Grants) का उपयोग पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कर सकती हैं। इसमें संविधान की 11वीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों के तहत विकास कार्य किए जाते हैं।
हालांकि, इस राशि का उपयोग वेतन या स्थापना लागतों के भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह से विकासात्मक परियोजनाओं के लिए समर्पित होती है, जिससे स्थानीय बुनियादी ढांचा सुधरे।
बुनियादी सेवाओं पर ध्यान
दूसरी ओर, बंधित अनुदान (Tied Grants) का उपयोग विशिष्ट बुनियादी सेवाओं के लिए अनिवार्य है। इसमें स्वच्छता, ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) स्थिति को बनाए रखना और अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं।
इसके अलावा, पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर यह राशि खर्च की जाती है। यह जल जीवन मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक है।
मंजूरी की प्रक्रिया
यह अनुदान पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय की अनुशंसा पर जारी किया जाता है। वित्त मंत्रालय अंतिम रूप से इन फंडों को राज्यों के खातों में स्थानांतरित करता है।
सरकार का यह कदम पंचायतों को वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के स्तर में व्यापक सुधार आने की उम्मीद है।