राजस्थान

पंचायतों के लिए ₹1500 करोड़ जारी: केंद्र सरकार ने 6 राज्यों की पंचायतों के लिए ₹1,500 करोड़ से अधिक का अनुदान जारी किया; जानें आपके राज्य को क्या मिला

मानवेन्द्र जैतावत · 31 मार्च 2026, 03:11 दोपहर
केंद्र सरकार ने तेलंगाना, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित 6 राज्यों में ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। यह फंड 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत बुनियादी ढांचे और स्वच्छता विकास के लिए दिया गया है।

नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मिजोरम और मेघालय में पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के लिए भारी भरकम फंड जारी किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत और जारी की गई है।

ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

यह अनुदान जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने और ग्रामीण विकास को गति देने के उद्देश्य से दिया गया है। इससे पंचायती राज संस्थाओं में आवश्यकता आधारित स्थानीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी ढांचे में सुधार होगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन निधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

तेलंगाना और उत्तराखंड को मिला विशेष अनुदान

तेलंगाना राज्य के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अबद्ध (Untied) अनुदान की पहली किस्त के रूप में 247.94 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह धनराशि राज्य की पात्र 12,600 ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में खर्च की जाएगी, जिससे वहां के स्थानीय प्रशासन को मदद मिलेगी। वहीं उत्तराखंड के लिए अबद्ध अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 91.31 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस फंड से उत्तराखंड की सभी 13 जिला पंचायतों, 95 ब्लॉक पंचायतों और 7,784 ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड की 216 ग्राम पंचायतों के लिए रुकी हुई किस्त के रूप में 1.84 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं।

राजस्थान और मेघालय के लिए भारी आवंटन

राजस्थान के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अबद्ध अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 315.61 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि राज्य की सभी 33 जिला पंचायतों, 352 उप परिषदों और 3,857 पात्र ग्राम पंचायतों के लिए आवंटित की गई है। मेघालय को भी वित्तीय वर्ष 2021-22 के अबद्ध अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में 27.00 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। यह धनराशि मेघालय की तीन स्वायत्त जिला परिषदों (खासी, गारो और जयंतिया) के विकास कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी। इसके साथ ही मेघालय को 22.20 करोड़ रुपये का बद्ध (Tied) अनुदान भी दिया गया है, जो 816 पात्र ग्राम परिषदों के लिए है।

महाराष्ट्र के लिए विस्तृत निधि का विवरण

महाराष्ट्र राज्य के लिए केंद्र सरकार ने कई किस्तों में बड़ी धनराशि जारी की है ताकि विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहे। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बद्ध अनुदानों की पहली और दूसरी किस्त के रूप में 109.06 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा वित्त वर्ष 2024-25 के बद्ध अनुदान की पहली किस्त के रोके गए हिस्से के रूप में 116.97 करोड़ रुपये दिए गए हैं। महाराष्ट्र को वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी किस्त के रूप में 329.21 करोड़ रुपये भी प्राप्त हुए हैं, जिससे हजारों ग्राम पंचायतों को लाभ होगा। राज्य के विकास को गति देने के लिए अबद्ध अनुदान की किस्तों के रूप में 72.70 करोड़ रुपये की दो अलग-अलग राशियां भी जारी की गई हैं।

अनुदान के उपयोग के नियम और शर्तें

भारत सरकार इन अनुदानों को पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय की अनुशंसा पर वित्त मंत्रालय के माध्यम से जारी करती है। इन निधियों को दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है: अबद्ध (Untied) और बद्ध (Tied) अनुदान। अप्रतिबंधित या अबद्ध अनुदानों का उपयोग पंचायतों द्वारा स्थानीय आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, लेकिन वेतन भुगतान के लिए नहीं। संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में वर्णित 29 विषयों के अंतर्गत आने वाले कार्यों पर ही यह पैसा खर्च किया जा सकेगा।

बद्ध अनुदान और स्वच्छता अभियान

बद्ध अनुदानों का उपयोग विशेष रूप से बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाना अनिवार्य है ताकि ग्रामीण जीवन सुगम हो सके। इसमें मुख्य रूप से स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इसके तहत अपशिष्ट प्रबंधन, मानव अपशिष्ट उपचार और घरेलू कचरे के प्रबंधन के लिए परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए भी इस निधि का उपयोग होगा।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

केंद्र सरकार का यह कदम सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इन अनुदानों के माध्यम से स्थानीय निकायों को वित्तीय स्वायत्तता मिलती है, जिससे वे अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान खुद कर पाते हैं। 6 राज्यों में जारी की गई यह राशि ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी। भविष्य में भी सरकार द्वारा इसी तरह के वित्तीय सहयोग से पंचायतों की कार्यक्षमता और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

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