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चैत्र पूर्णिमा 2026 की सही तारीख: चैत्र पूर्णिमा 2026: 1 या 2 अप्रैल कब है व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि

thinQ360 · 31 मार्च 2026, 03:11 दोपहर
चैत्र पूर्णिमा 2026 की तारीख को लेकर उलझन में हैं? जानें कब रखा जाएगा व्रत, क्या है स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और इस दिन बनने वाले विशेष योगों का महत्व।

नई दिल्ली | हिंदू धर्म में चैत्र मास की पूर्णिमा का विशेष स्थान है। यह न केवल चैत्र माह का अंतिम दिन होता है, बल्कि इस दिन भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाते हैं।

साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 1 अप्रैल तो कुछ 2 अप्रैल को मान रहे हैं।

ज्योतिष शास्त्र और हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल पूर्णिमा तिथि दो दिनों में विभाजित है। आइए विस्तार से जानते हैं कि व्रत और पूजा के लिए कौन सा दिन श्रेष्ठ है।

चैत्र पूर्णिमा 2026 की सटीक तिथि

पंचांग के मुताबिक, चैत्र पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर होगा। यह तिथि अगले दिन यानी 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगी।

शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन शाम के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान हो और चंद्रोदय हो। चंद्रमा की पूजा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

इस गणना के आधार पर, 1 अप्रैल 2026 को ही चैत्र पूर्णिमा का व्रत और पूजन करना शास्त्रसम्मत होगा। 2 अप्रैल को सूर्योदय के कुछ समय बाद ही तिथि समाप्त हो जाएगी।

शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

व्रत रखने वाले भक्तों के लिए 1 अप्रैल का दिन ही सबसे उत्तम है। इस दिन शाम के समय चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है।

पूर्णिमा का विशेष पूजन मुहूर्त 1 अप्रैल को शाम 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 7 बजकर 00 मिनट तक रहेगा। इस दौरान की गई पूजा अत्यंत फलदायी और समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है।

बन रहे हैं कई शुभ योग

इस साल की चैत्र पूर्णिमा इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ और शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। ये योग जातकों के लिए सफलता के द्वार खोलेंगे।

1 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 11 मिनट से शाम 4 बजकर 17 मिनट तक 'रवि योग' रहेगा। यह योग कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर कर सफलता दिलाने वाला माना जाता है।

इसके बाद शाम 4 बजकर 17 मिनट से 6 बजकर 10 मिनट तक 'सर्वार्थ सिद्धि योग' रहेगा। इस समय में की गई खरीदारी या नया काम शुरू करना अत्यंत शुभ और लाभकारी होता है।

दिन के अंत में 'वृद्धि' और 'ध्रुव' योग भी प्रभावी रहेंगे। इन योगों के संगम से इस पूर्णिमा का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। दान और तप का फल कई गुना बढ़ जाता है।

पूजा विधि और महत्व

चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करने का विधान है। यदि नदी संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

स्नान के बाद भगवान सत्यनारायण की पूजा करें और उनकी कथा का श्रवण करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। इस दिन दान-पुण्य करने से अक्षय फल मिलता है।

चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इसलिए बजरंगबली को सिंदूर चढ़ाना और हनुमान चालीसा का पाठ करना कष्टों से मुक्ति दिलाता है। चमेली के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है।

क्यों खास है यह पूर्णिमा?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र साल का पहला महीना होता है। इसकी पूर्णिमा नए साल की पहली पूर्णिमा होती है, जो ऊर्जा और नई सकारात्मकता का संचार करती है।

इस दिन किए गए जप, तप और दान का फल अन्य पूर्णिमाओं की तुलना में अधिक मिलता है। यह दिन चित्त की शुद्धि और आध्यात्मिक विकास के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

भगवान सत्यनारायण की पूजा में केले के पत्ते और पंचामृत का उपयोग करें। पंजीरी का प्रसाद बांटना न भूलें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में खुशहाली बनी रहती है।

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