क्राइम

दौसा अस्पताल: मरीज की पिटाई: दौसा जिला अस्पताल में मानवता शर्मसार: इलाज मांगने पर मरीज को कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा

मानवेन्द्र जैतावत · 27 मार्च 2026, 10:13 दोपहर
राजस्थान के दौसा जिला अस्पताल में इलाज के लिए आए एक मरीज के साथ अस्पताल कर्मियों द्वारा मारपीट का मामला सामने आया है। पथरी के दर्द से कराह रहे मरीज ने जब जल्दी इलाज की मांग की, तो गार्ड और स्टाफ ने उसे कमरे में बंद कर पीटा।

दौसा | राजस्थान के दौसा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां के रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय में इलाज कराने आए एक मरीज के साथ अस्पताल के कर्मचारियों ने बेरहमी से मारपीट की।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, दौसा निवासी नंदलाल को पथरी की समस्या के कारण तेज दर्द हो रहा था। दर्द से राहत पाने के लिए वह गुरुवार सुबह जिला अस्पताल पहुंचा था। अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने जांच के बाद उसे राहत के लिए एक इंजेक्शन लिखा। नंदलाल ने दर्द के कारण स्टाफ से जल्दी इंजेक्शन लगाने का अनुरोध किया। मरीज का आरोप है कि जैसे ही उसने जल्दी इलाज की बात कही, वहां मौजूद स्टाफ और गार्ड भड़क गए। इसके बाद उनके बीच कहासुनी शुरू हो गई।

कमरे में बंद कर की पिटाई

विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल के गार्ड और अन्य कर्मचारियों ने नंदलाल के साथ मारपीट शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ कर्मचारी एक व्यक्ति को पहले पीट रहे हैं। इसके बाद उसे घसीटकर एक कमरे में ले जाया जा रहा है। नंदलाल ने बताया कि उसे कमरे में बंद कर दिया गया और वहां भी उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। वह मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी।

प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस अस्पताल पहुंची। कोतवाली के एसआई हरि सिंह ने बताया कि दोनों पक्ष थाने आए थे, लेकिन किसी ने लिखित शिकायत नहीं दी। पुलिस के अनुसार, बाद में दोनों पक्षों ने इसे एक गलतफहमी बताते हुए मामला शांत कर लिया। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। जिला अस्पताल के पीएमओ (PMO) डॉ. आरके मीणा ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होगी।

अस्पताल का विवादों से पुराना नाता

रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय पहले भी कई बार अपनी अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में रहा है। अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन के नियंत्रण पर सवाल उठते रहे हैं। जून 2019 में तत्कालीन एनएचएम निदेशक डॉ. समित शर्मा ने यहां औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान भारी लापरवाही मिलने पर सात कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। इतना ही नहीं, इस अस्पताल में फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी करने का बड़ा घोटाला भी सामने आ चुका है। इस मामले में कई डॉक्टरों और कर्मियों पर गाज गिरी थी।

जनता में भारी रोष

मरीज के साथ हुई इस मारपीट के बाद जिले के नागरिकों में भारी गुस्सा है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि जिला प्रशासन के आला अधिकारी नियमित रूप से अस्पताल का औचक निरीक्षण करें। ताकि व्यवस्थाओं में सुधार हो सके और मरीजों को सुरक्षा मिले। लोगों का तर्क है कि अगर मरीज की गलती भी थी, तो भी कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

व्यवस्था सुधारने की जरूरत

अस्पताल में बार-बार होने वाले हंगामे यह दर्शाते हैं कि यहां सुरक्षा और स्टाफ के व्यवहार में भारी कमी है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल, यह वीडियो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि जांच के बाद अस्पताल प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। चिकित्सा विभाग को चाहिए कि वह अपने कर्मचारियों के लिए व्यवहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित करे। ताकि वे विपरीत परिस्थितियों में भी संयम के साथ काम कर सकें। इस घटना ने एक बार फिर राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। मरीज अब सरकारी अस्पतालों में जाने से डरने लगे हैं। दौसा के सरकारी अस्पतालों में पहले भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी धन का गबन करने का मामला अभी भी ताजा है। इस घोटाले के कारण राज्य सरकार ने 9 डॉक्टरों और 11 चिकित्सा कर्मियों को एपीओ कर दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में कड़ी जांच के आदेश दिए थे। इन सभी घटनाओं से स्पष्ट है कि रामकरण जोशी जिला अस्पताल में प्रशासनिक पकड़ ढीली हो चुकी है। जिसका खामियाजा अब सीधे तौर पर आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

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