नई दिल्ली | पंचायती राज मंत्रालय ने देश के ग्रामीण इलाकों में डिजिटल और समावेशी शासन को बढ़ावा देने की दिशा में दो ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत की ग्राम पंचायतों ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में एक लंबी छलांग लगाई है।
ई ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक कुल ₹3 लाख करोड़ से अधिक के भुगतान सफलतापूर्वक रूट किए गए हैं। यह आंकड़ा ग्रामीण भारत की बदलती वित्तीय तस्वीर और डिजिटल अपनाने की गति को दर्शाता है।
इसके साथ ही, मंत्रालय का एआई-संचालित 'सभासार' टूल अब 23 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो गया है। यह जमीनी स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और समावेशी भागीदारी को और अधिक मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।
ई ग्रामस्वराज: पारदर्शिता का नया मानक
तकनीकी-संचालित शासन की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। ई ग्रामस्वराज के माध्यम से विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं को वास्तविक समय में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे पूर्ण जवाबदेही बनी रहती है।
इससे पूरी प्रक्रिया में डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित हुई है। ई-पंचायत मिशन मोड प्रोजेक्ट के तहत विकसित यह प्लेटफॉर्म पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के साथ पूरी तरह एकीकृत है।
यह सिस्टम पंचायत स्तर पर योजना, लेखांकन और व्यय को सुव्यवस्थित करता है। इसने पुरानी नकद-आधारित और कागजी प्रक्रियाओं को तेज, जवाबदेह और धोखाधड़ी-रोधी डिजिटल सिस्टम से बदल दिया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, पंचायती राज संस्थाओं ने इस इंटरफेस के माध्यम से ₹53,342 करोड़ हस्तांतरित किए हैं। करीब 2,55,254 ग्राम पंचायतों ने अपनी विकास योजनाएं पोर्टल पर अपलोड की हैं।
वर्तमान में कुल 2,59,798 पंचायती राज संस्थाएं (PRI) इस प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हैं। इनमें से 2,50,807 संस्थाओं ने चालू वित्तीय वर्ष में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा का सक्रिय रूप से उपयोग किया है।
सभासार: भाषाई बाधाएं हुईं खत्म
ग्रामीण परिवर्तन को पूरक बनाने के लिए 14 अगस्त 2025 को 'सभासार' लॉन्च किया गया था। यह एक एआई-संचालित वॉयस-टू-टेक्स्ट मीटिंग सारांश टूल है जो अब 23 भाषाओं में कार्य करता है।
हाल ही में इसमें असमिया, बोडो, डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, नेपाली, संथाली और सिंधी जैसी 10 नई भाषाएं जोड़ी गई हैं। इससे स्थानीय भाषाओं में ग्राम सभा की कार्यवाही रिकॉर्ड करना आसान होगा।
सभासार स्वचालित रूप से बैठक के मिनट्स, उपस्थिति, संकल्पों और कार्य बिंदुओं को रिकॉर्ड करता है। इससे ग्राम सभा की प्रक्रियाएं अधिक सुलभ, पारदर्शी और भागीदारीपूर्ण बन गई हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
29 जनवरी 2026 तक 1.11 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर चुकी हैं। इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा गया है, जो इसकी सफलता का प्रमाण है।
इसे 'टेक्नोलॉजी सभा एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026' में एआई श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। साथ ही 'इकोनॉमिक टाइम्स गॉवटेक अवॉर्ड्स' में इसे सोशल इम्पैक्ट के लिए सिल्वर मेडल मिला।
ये विकास डिजिटल रूप से सशक्त और पारदर्शी पंचायतों की दिशा में मंत्रालय के निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी और वित्तीय शासन दोनों को मजबूती मिल रही है।