नई दिल्ली | केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए 'एडवांसेज इन ओबेसिटी एंड लिपिड मैनेजमेंट इन सीवीडी' नामक पाठ्यपुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने देश की बदलती स्वास्थ्य चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत में मोटापे की परिभाषा को केवल शरीर के वजन से जोड़कर देखना एक बड़ी भूल हो सकती है। डॉ. सिंह ने विशेष रूप से 'पेट के मोटापे' या शरीर के मध्य भाग में जमा होने वाली चर्बी के खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने इसे सामान्य मोटापे की तुलना में कहीं अधिक जोखिम भरा बताया।
भारतीय शारीरिक संरचना और छिपे हुए खतरे
मंत्री जी ने भारतीय संदर्भ में स्वास्थ्य की बारीकियों को समझाया। उन्होंने कहा कि कई भारतीय बाहर से दुबले-पतले दिखाई देते हैं, लेकिन उनके आंतरिक अंगों के आसपास वसा जमा होती है। इस स्थिति को अक्सर 'थिन-फैट' फेनोटाइप कहा जाता है। इसमें व्यक्ति का वजन सामान्य हो सकता है, लेकिन उसकी आंतरिक वसा या विसरल फैट का स्तर बहुत अधिक होता है। यह आंतरिक वसा मेटाबॉलिक सिंड्रोम का मुख्य कारण बनती है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि शरीर के मध्य भाग का मोटापा अपने आप में एक स्वतंत्र जोखिम कारक है।
मेटाबॉलिक विकारों का बढ़ता जाल
समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि पेट की चर्बी सीधे तौर पर मधुमेह और उच्च रक्तचाप से जुड़ी है। इसके कारण इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या पैदा होती है। इतना ही नहीं, यह फैटी लिवर, डिस्लिपिडेमिया और विभिन्न हृदय रोगों का भी मूल कारण है। देखने में सामान्य लगने वाले व्यक्ति भी इन बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। डॉ. सिंह ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते पेट के मोटापे की पहचान नहीं की गई, तो यह गंभीर नैदानिक जटिलताओं को जन्म दे सकता है। इसके लिए शीघ्र जांच और लक्षित उपचार अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री मोदी का 'स्वस्थ भारत' का आह्वान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पुस्तक को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप बताया। प्रधानमंत्री ने बार-बार देशवासियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया है। मोटापे की बढ़ती समस्या से निपटना अब एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है। प्रधानमंत्री का आह्वान जन जागरूकता बढ़ाने और अस्वास्थ्यकर आहार को त्यागने पर केंद्रित है। यह पहल 'विकसित भारत, स्वस्थ भारत और मोटापा मुक्त भारत' के व्यापक दृष्टिकोण के साथ मेल खाती है। मंत्री जी ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
युवा आबादी और बदलती जीवनशैली
मंत्री जी ने युवा पीढ़ी में बढ़ते टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोगों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बदलती जीवनशैली और शारीरिक सक्रियता में कमी का परिणाम है। आज के दौर में खान-पान की गलत आदतें और तनाव युवाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। कम उम्र में होने वाली हृदय संबंधी जटिलताएं समाज के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने संतुलित स्वास्थ्य प्रथाओं के महत्व पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने कहा कि फिटनेस के लिए अवैज्ञानिक और अत्यधिक प्रयास भी कभी-कभी जोखिम भरे हो सकते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निवारक देखभाल
डॉ. सिंह ने सलाह दी कि बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के अत्यधिक परिश्रम करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। जीवनशैली में अनुशासन और पर्याप्त नींद बहुत जरूरी है। उन्होंने वैज्ञानिक रूप से निर्देशित निवारक देखभाल की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, निवारक स्वास्थ्य सेवा ही भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली का आधार होनी चाहिए। यह पाठ्यपुस्तक इसी दिशा में एक कदम है, जो डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों से अवगत कराएगी। इसमें मोटापे के प्रबंधन के लिए नवीनतम शोध शामिल किए गए हैं।
पाठ्यपुस्तक की विशेषताएं और विशेषज्ञता
प्रख्यात हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. एच.के. चोपड़ा द्वारा संपादित यह पुस्तक चिकित्सा जगत के लिए एक अनमोल संसाधन है। इसमें भारत और विदेशों के 300 से अधिक विशेषज्ञों के विचार शामिल हैं। यह पुस्तक पारंपरिक उपचार पद्धतियों से हटकर 'सटीक रोकथाम' (Precision Prevention) की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। इसमें डिजिटल स्वास्थ्य और एआई के उपयोग पर भी चर्चा की गई है। पुस्तक में 23 खंड और 172 अध्याय हैं, जो मोटापे और लिपिड प्रबंधन के हर पहलू को कवर करते हैं। यह शोध और वास्तविक रोगी देखभाल के बीच के अंतर को कम करने का प्रयास है।
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का समावेश
इस प्रकाशन में सेमाग्लूटाइड और तिरज़ेपाटाइड जैसे आधुनिक जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट के बारे में विस्तार से बताया गया है। ये दवाएं मोटापे के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। इसके अलावा, लिपिड कम करने वाली रणनीतियों जैसे स्टेटिन, एज़ेटिमिब और जीन-आधारित उपचारों का भी वर्णन है। ये उन्नत चिकित्सा पद्धतियां हृदय संबंधी परिणामों में सुधार करेंगी। मंत्री जी ने कहा कि एआई-सक्षम नैदानिक निर्णय प्रणाली डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगी। इससे मरीजों को अधिक सटीक और व्यक्तिगत उपचार मिल सकेगा।
भविष्य की चुनौतियां और 2050 का अनुमान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य के खतरों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि 2050 तक भारत में मोटापे के प्रसार में तीव्र वृद्धि हो सकती है। यह वृद्धि न केवल स्वास्थ्य के लिए बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी जोखिम पैदा करेगी। इसलिए, प्रारंभिक जांच और निवारक स्वास्थ्य उपायों को अभी से मजबूत करना होगा। उन्होंने मोटापा और डिसलिपिडेमिया को एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती करार दिया। इसके समाधान के लिए साक्ष्य-आधारित नैदानिक प्रथाओं को बढ़ावा देना आवश्यक है।
समारोह में प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति
इस अवसर पर डॉ. एच.के. चोपड़ा के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियां उपस्थित थीं। इनमें डॉ. विवेका कुमार, डॉ. प्रवीण चंद्र और डॉ. जेपीएस साहनी जैसे विशेषज्ञ शामिल थे। डॉ. सिंह ने पूरी संपादकीय टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रामाणिक ग्रंथों का संकलन चिकित्सा शिक्षा और क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। अंत में, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर हृदय रोग प्रबंधन के मानकों को ऊंचा करेगी। स्वस्थ जीवन ही विकसित भारत का आधार है।