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उर्वरक कालाबाजारी पर सरकार की स्ट्राइक: उर्वरक की कालाबाजारी पर सरकार सख्त: 6900 से अधिक लाइसेंस रद्द, किसानों को सस्ती खाद सुनिश्चित करने के लिए उठाए कड़े कदम

मानवेन्द्र जैतावत · 27 मार्च 2026, 12:51 दोपहर
भारत सरकार ने उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाते हुए 6,900 से अधिक लाइसेंस रद्द किए हैं। रबी सीजन के दौरान किसानों को उचित मूल्य पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने के लिए कड़े प्रवर्तन उपाय और सब्सिडी योजनाएं जारी हैं।

नई दिल्ली | भारत सरकार ने उर्वरकों की जमाखोरी, हेराफेरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए देशव्यापी स्तर पर कड़े प्रवर्तन उपाय लागू किए हैं। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया एस. पटेल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

लाइसेंस रद्दीकरण और व्यापक छापेमारी

प्रवर्तन एजेंसियों ने अप्रैल 2025 से अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 4,66,415 छापेमारी की है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उर्वरकों की कृत्रिम कमी को रोकना है। इन छापों के परिणामस्वरूप प्रशासन ने 16,246 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, नियमों का उल्लंघन करने वाले 6,802 उर्वरक लाइसेंसों को निलंबित या पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। गंभीर अनियमितताओं के मामलों में अब तक 821 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। अकेले फरवरी 2026 में ही जमाखोरी के खिलाफ दो लाइसेंस रद्द किए गए और दो नई एफआईआर दर्ज हुईं।

उर्वरकों की उपलब्धता के ताजा आंकड़े

वर्तमान रबी 2025-26 सीजन के दौरान देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यूरिया की मांग 191.72 एलएमटी है, जबकि सरकार ने 249.17 एलएमटी की उपलब्धता सुनिश्चित की है। अब तक 196.42 एलएमटी की बिक्री हो चुकी है। इसी तरह, डीएपी की 52.72 एलएमटी मांग के मुकाबले 74.55 एलएमटी स्टॉक उपलब्ध है। एनपीकेएस की उपलब्धता भी 114.66 एलएमटी के साथ मांग से काफी अधिक है।

किसानों के लिए सब्सिडी और किफायती दरें

किसानों को यूरिया सब्सिडी योजना के तहत 45 किलो का बैग मात्र 242 रुपये (बिना नीम कोटिंग और कर) में उपलब्ध कराया जा रहा है। यूरिया की उत्पादन लागत और एमआरपी के बीच के बड़े अंतर को केंद्र सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करती है। यह राशि सीधे निर्माताओं और आयातकों को दी जाती है।

एनबीएस योजना और पी एंड के उर्वरक

फॉस्फेट और पोटैशियम (पी एंड के) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना को सरकार ने निरंतर जारी रखा है। सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों की नियमित निगरानी करती है। कीमतों में उतार-चढ़ाव होने पर एनबीएस दरों को इस तरह समायोजित किया जाता है कि किसानों पर बोझ न पड़े। विशेष रूप से, रबी 2025-26 के लिए डीएपी और टीएसपी पर 3500 रुपये प्रति मीट्रिक टन का अतिरिक्त विशेष प्रावधान लागू किया गया है। इसमें कारखाने से खेत तक की लागत और जीएसटी घटक को भी ध्यान में रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को 4 प्रतिशत की दर से उचित प्रतिफल सुनिश्चित हो। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग साप्ताहिक आधार पर राज्यों के साथ मिलकर आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी कर रहा है ताकि खाद का वितरण पारदर्शी बना रहे।

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