नई दिल्ली | भारत सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए उर्वरकों की जमाखोरी, हेराफेरी और कालाबाजारी के खिलाफ एक व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया एस. पटेल ने लोकसभा में इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों की अवैध बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उर्वरक कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई: उर्वरक कालाबाजारी पर सरकार का कड़ा प्रहार: 6,900 से अधिक लाइसेंस रद्द, 821 FIR दर्ज और लाखों छापे
भारत सरकार ने उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। अब तक 6,900 से अधिक लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सैकड़ों प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
HIGHLIGHTS
- सरकार ने उर्वरक कालाबाजारी के खिलाफ 4.66 लाख से अधिक छापे मारे हैं।
- नियमों का उल्लंघन करने पर 6,802 से अधिक लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए।
- किसानों को किफायती दरों पर यूरिया और पीएंडके उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी जारी है।
- रबी सीजन 2025-26 के लिए देश में यूरिया और डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
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प्रवर्तन कार्रवाई के आंकड़े
अप्रैल 2025 से अब तक प्रवर्तन एजेंसियों ने देशभर में कुल 4,66,415 छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है। यह अभियान कालाबाजारी रोकने के लिए चलाया गया है। इन छापों के परिणामस्वरूप, नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं को 16,246 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। कड़ी कार्रवाई करते हुए, सरकार ने अब तक 6,802 उर्वरक लाइसेंसों को या तो निलंबित कर दिया है या पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, गंभीर उल्लंघन के मामलों में 821 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। अकेले फरवरी 2026 में ही 28 नोटिस और दो लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई हुई है।
सस्ती यूरिया और भारी सब्सिडी
किसानों को किफायती दामों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है। यूरिया सब्सिडी योजना के तहत कीमतें नियंत्रित रखी गई हैं। वर्तमान में, 45 किलो यूरिया के एक बैग की एमआरपी केवल 242 रुपये निर्धारित की गई है। इसमें नीम कोटिंग और करों का शुल्क अलग से शामिल नहीं है। यूरिया की वास्तविक उत्पादन या आयात लागत और किसानों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत के बीच के बड़े अंतर को सरकार वहन करती है। यह राशि सीधे निर्माताओं और आयातकों को सब्सिडी के रूप में दी जाती है ताकि खेती की लागत कम रहे। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए उठाया गया है।
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पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना
फॉस्फेट और पोटैशियम (P&K) उर्वरकों के लिए सरकार ने पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (NBS) योजना को जारी रखने का निर्णय लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाने के लिए यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार वैश्विक कीमतों पर पैनी नजर रखती है। खरीफ 2025 और रबी 2025-26 के लिए डीएपी और टीएसपी उर्वरकों पर 3,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन का विशेष प्रावधान भी लागू किया गया है। इसमें कारखाने से खेत तक की लागत और जीएसटी जैसे घटकों का भी ध्यान रखा गया है।
रबी सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक
देश में वर्तमान रबी 2025-26 सीजन के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। आंकड़ों के अनुसार, यूरिया की मांग 191.72 एलएमटी के मुकाबले उपलब्धता 249.17 एलएमटी सुनिश्चित की गई है। डीएपी की उपलब्धता भी 74.55 एलएमटी रही है जो मांग से अधिक है। एमओपी और एनपीकेएस की आपूर्ति भी सुचारू रूप से चल रही है। सरकार साप्ताहिक आधार पर राज्यों के साथ मिलकर खाद की आपूर्ति और वितरण की निगरानी कर रही है। इससे खाद की कृत्रिम कमी पैदा करने वालों पर लगाम लगी है।
कानूनी ढांचा और सख्त निगरानी
उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु घोषित किया गया है। यह कानून राज्य सरकारों को दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार देता है। केंद्र सरकार नियमित रूप से राज्यों के साथ समन्वय करती है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग साप्ताहिक आधार पर जमीनी स्तर की स्थितियों की समीक्षा करता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाना और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देना है। सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।
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मानवेन्द्र जैतावत