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ईरान का अमेरिकी जहाज पर हमला: ईरान-अमेरिका युद्ध: USS अब्राहम लिंकन पर मिसाइल दागने का दावा, क्या खाड़ी में छिड़ेगी महाजंग?

प्रदीप बीदावत · 25 मार्च 2026, 01:28 दोपहर
ईरान ने अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन पर मिसाइल हमले का दावा किया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इजराइल ने 4 लाख सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है, जबकि पाकिस्तान और तुर्किये शांति वार्ता की कोशिश कर रहे हैं।

तेहरान/तेल अवीव | पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। ईरान ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि उसकी नौसेना ने अमेरिकी जंगी जहाज, एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पर मिसाइल हमला किया है। ईरानी सेना के मुताबिक, यह हमला इतना प्रभावशाली था कि अमेरिकी बेड़े को अपनी मौजूदा स्थिति छोड़कर भागना पड़ा। हालांकि, वाशिंगटन की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस खबर ने वैश्विक बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

USS अब्राहम लिंकन पर हमला और ईरान की चेतावनी

ईरानी नौसेना के प्रमुख शहराम ईरानी ने गर्व के साथ घोषणा की कि उनके सैनिकों ने कादेर क्रूज मिसाइलों का उपयोग करके अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को निशाना बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी सेना अमेरिकी बेड़े की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रख रही है। शहराम ईरानी ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जैसे ही यह बेड़ा दोबारा हमारी मिसाइल रेंज के भीतर कदम रखेगा, उस पर और भी अधिक शक्तिशाली और विनाशकारी हमले किए जाएंगे। ईरान का यह रुख दिखाता है कि वह अब सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य शक्ति को चुनौती देने से पीछे नहीं हट रहा है।

युद्ध की विभीषिका: मौत और तबाही के आंकड़े

इस जंग ने मानवीय स्तर पर जो तबाही मचाई है, उसके आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं। अब तक इस संघर्ष में करीब 1,500 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 18,551 से अधिक लोग घायल हैं। मरने वालों में 8 महीने के मासूम बच्चों से लेकर 88 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं। युद्ध की मार सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों पर पड़ी है; अब तक करीब 200 महिलाओं की मौत हो चुकी है। 28 फरवरी को एक स्कूल पर हुए भीषण हमले में 168 बच्चों की जान चली गई थी, जिसने दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिसमें 55 हेल्थ वर्कर्स घायल हुए और 11 की मौत हो गई।

इजराइल की सैन्य तैयारी और 15,000 बमों की बरसात

दूसरी ओर, इजराइल ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए ईरान पर अब तक 15,000 से ज्यादा बम गिराए हैं। इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने बताया कि यह हमला पिछले साल के संघर्षों की तुलना में चार गुना अधिक तीव्र है। इतना ही नहीं, इजराइल सरकार ने 4 लाख रिजर्व सैनिकों को बुलाने की मंजूरी दे दी है। सेना (IDF) का कहना है कि यह फैसला अलग-अलग मोर्चों पर बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए लिया गया है। पहले यह सीमा 2.8 लाख थी, जिसे अब बढ़ाकर युद्ध की गंभीरता को देखते हुए 4 लाख कर दिया गया है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक तेल संकट

युद्ध का असर केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि समुद्र के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों पर भी दिख रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है, वहां ट्रैफिक लगभग ठप हो गया है। पिछले 24 घंटों में वहां से केवल चार जहाज गुजरे हैं। ईरान फिलहाल केवल चुनिंदा जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दे रहा है। हाल ही में थाईलैंड के एक तेल टैंकर को ईरान के साथ विशेष बातचीत के बाद ही वहां से सुरक्षित निकलने का रास्ता मिला। थाई विदेश मंत्री ने खुद ईरान से सुरक्षा का आश्वासन मांगा था, जिसके बाद यह संभव हो पाया।

शांति की कोशिशें: पाकिस्तान और तुर्किये की भूमिका

तनाव के बीच कुछ देश शांति का रास्ता निकालने की कोशिश भी कर रहे हैं। पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए ट्रम्प प्रशासन द्वारा दिया गया सीजफायर प्रस्ताव ईरान को सौंप दिया है। अब दुनिया की नजरें ईरान के जवाब पर टिकी हैं। वहीं, तुर्किये भी अमेरिका और ईरान के बीच एक संदेशवाहक (मैसेंजर) के रूप में काम कर रहा है। तुर्किये के विदेश मामलों के उपाध्यक्ष हारुन अरमगान ने कहा कि उनका मकसद दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का रास्ता तैयार करना है ताकि क्षेत्र में और अधिक खून-खराबे को रोका जा सके।

ट्रम्प, नेतन्याहू और खाड़ी देशों का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस संकट के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की जमकर तारीफ की है और उन्हें एक 'योद्धा' बताया है। ट्रम्प का मानना है कि सऊदी अरब, यूएई और कतर इस युद्ध में अमेरिका के मजबूत सहयोगी हैं। दूसरी ओर, इजराइली मंत्री निर बरकात ने संकेत दिया है कि ट्रम्प और नेतन्याहू मिलकर ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म करने की योजना पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोई भी समझौता तभी होगा जब ईरान की सैन्य ताकत शून्य हो जाएगी।

तेल अवीव में 'कौवों का खौफ' और अंधविश्वास

युद्ध के बीच इजराइल की राजधानी तेल अवीव से एक अजीबोगरीब खबर सामने आई है। वहां आसमान में कौवों का एक विशाल झुंड मंडराते हुए देखा गया, जिसे स्थानीय लोग किसी बड़ी अनहोनी या आपदा का संकेत मान रहे हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों और पक्षी विशेषज्ञों ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे एक सामान्य पक्षी प्रवास बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल लाखों पक्षी इस रास्ते से गुजरते हैं और इसका युद्ध से कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। फिर भी, युद्ध के माहौल में इस तरह की घटनाओं ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है।

फिलहाल, पश्चिम एशिया एक बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान की मिसाइलें, अमेरिका की सैन्य तैनाती और इजराइल की आक्रामकता ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। क्या कूटनीति इस युद्ध को रोक पाएगी या USS अब्राहम लिंकन पर हुआ यह हमला एक विश्व युद्ध की शुरुआत साबित होगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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