जालोर | जालोर जिला मुख्यालय पर गणपत सिंह मांडोली मामले में न्याय की मांग को लेकर परिजनों का धरना और आमरण अनशन 17वें दिन भी जारी रहा। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, क्योंकि न्याय की आस में बैठा परिवार झुकने को तैयार नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय सांसद, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और परिजनों से संवाद किया।
मांडोली केस: 17वें दिन भी अनशन जारी: जालोर: गणपत सिंह मांडोली केस में 17वें दिन भी भूख हड़ताल जारी, प्रशासन और सांसद की अपील ठुकराई
जालोर में गणपत सिंह मांडोली मामले को लेकर परिजनों का अनशन 17वें दिन भी जारी रहा। सांसद, कलेक्टर और एसपी ने मौके पर पहुंचकर धरना खत्म करने की अपील की, लेकिन परिजनों ने न्याय मिलने तक पीछे हटने से इनकार कर दिया है।
HIGHLIGHTS
- जालोर जिला मुख्यालय पर गणपत सिंह मांडोली मामले में 17वें दिन भी धरना जारी। सांसद, कलेक्टर और एसपी ने धरना स्थल पर जाकर परिजनों से की मुलाकात। 80 वर्षीय बुजुर्ग मां की बिगड़ती तबीयत के बावजूद परिवार अनशन पर अड़ा। परिजनों ने प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए धरना खत्म करने से किया इनकार।
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प्रशासन की अपील और परिजनों का रुख
प्रशासनिक अधिकारियों और सांसद ने धरना स्थल पर पहुंचकर परिजनों से धरना समाप्त करने का आग्रह किया। अधिकारियों का मुख्य तर्क 80 वर्षीय बुजुर्ग मां की बिगड़ती सेहत थी। प्रशासन ने मानवीय आधार पर अपील की कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण अनशन को खत्म कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, मांडोली परिवार ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएंगे और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
बुजुर्ग मां की बिगड़ती तबीयत
पिछले 17 दिनों से जारी इस भूख हड़ताल का सबसे गंभीर पहलू गणपत सिंह मांडोली की 80 वर्षीय मां की सेहत है। लंबे समय से अन्न का त्याग करने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है, लेकिन परिवार का कहना है कि जब तक गणपत सिंह को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। मां की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इस आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान की है।
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परिजनों ने लगाया दबाव का आरोप
परिजनों ने प्रशासनिक अधिकारियों के आगमन को एक प्रकार का मनोवैज्ञानिक दबाव बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन को उनकी सेहत की चिंता करने के बजाय मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए। परिवार का कहना है कि भूख हड़ताल को समाप्त करना उनके लिए विकल्प नहीं है, क्योंकि यह लड़ाई अब उनके आत्मसम्मान और न्याय की है। जालोर के इस मामले ने पूरे क्षेत्र में चर्चा छेड़ दी है और लोग सोशल मीडिया के माध्यम से परिवार को समर्थन दे रहे हैं। thinQ360 इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
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