जालोर

कूका से नंदगांव तक गोसेवा यात्रा: भीनमाल के कूका से नंदगांव तक गोसेवकों की भव्य यात्रा, पर्यावरण संरक्षण और गौसेवा का दिया संदेश

thinQ360 · 27 मार्च 2026, 09:05 सुबह
भीनमाल के कूका गांव से सिरोही के नंदगांव तक गोसेवकों ने एक भव्य धार्मिक यात्रा निकाली। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था।

भीनमाल | राजस्थान के जालौर जिले के भीनमाल क्षेत्र में आस्था और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिला। कूका गांव से सिरोही जिले के केसुआ (नंदगांव) तक गोसेवकों ने एक भव्य और प्रेरणादायक धार्मिक यात्रा संपन्न की।

श्रद्धा और उत्साह का संगम

इस यात्रा की शुरुआत कूका गांव में स्थित प्रसिद्ध श्री दूदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण से हुई। भामाशाह और परम गोभक्त हरचंद पुरोहित खांडा देवल के विशेष सहयोग से इस यात्रा का सफल आयोजन किया गया।सुरभि नवरात्रा के पावन अवसर पर आयोजित इस यात्रा में कूकावास, भालणी, डूंगरवा और गांवड़ी सहित पूरे भीनमाल क्षेत्र से करीब 125 गोसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।यात्रा का नेतृत्व प्रमुख गोसेवक ओमप्रकाश बिश्नोई ने किया। उनके साथ ब्रह्मचारी गोसेवक नारायण मांजू, गोशाला संचालक जेठाराम सुथार और पदमाराम चौधरी जैसे समर्पित व्यक्तित्व भी इस यात्रा का हिस्सा बने।यात्रा के दौरान गोसेवकों की टोली भजनों पर झूमती नजर आई। साजन सियाक, सेवानिवृत्त शिक्षक रणछोड़ा राम सुधार और दुर्गाराम मांजू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक सफर को यादगार बनाया।

नंदगांव में गोपूजन और दर्शन

जैसे ही गोसेवकों का यह दल अभिनव ब्रजमंडल गोलोकतीर्थ नंदगांव पहुंचा, वहां का वातावरण भक्ति के रस में डूब गया। श्रद्धालुओं ने सबसे पहले सामूहिक रूप से सात्विक भोजन प्रसादी ग्रहण की।इसके बाद श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ गौशाला की विधिवत परिक्रमा की। गोपूजन के साथ-साथ विभिन्न गोधाम विभागों और वहां स्थित मंदिरों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

पर्यावरण और गौसेवा का संकल्प

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण क्षण गोऋषि स्वामी श्री दतशरणानंद का सान्निध्य रहा। श्रद्धालुओं ने ठाकुर भगवान गोवर्धन महाराज के दर्शन किए और उत्थापन आरती में उत्साहपूर्वक भाग लिया।ग्रामीणों ने इस यात्रा के माध्यम से समाज को गौसेवा और गो-आधारित पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। उनका मानना है कि गौवंश की सेवा से ही प्रकृति और पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों को अपनी संस्कृति और प्रकृति से जोड़ने का एक सफल प्रयास साबित हुई है।

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