नई दिल्ली | भारत सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। लोकसभा में हाल ही में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है।
कानूनी ढांचा और आईटीपीए अधिनियम
सरकार ने मानव तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण जैसे गंभीर अपराधों से निपटने के लिए अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (ITPA) को लागू किया है। यह कानून व्यावसायिक यौन शोषण को परिभाषित करता है और अपराधियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य तस्करी को रोकना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है। हालांकि, वेश्यावृत्ति और भिक्षावृत्ति से संबंधित केंद्रीकृत आंकड़े मंत्रालय द्वारा नहीं रखे जाते हैं, क्योंकि यह राज्य का विषय है।
मिशन शक्ति: एक व्यापक दृष्टिकोण
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 'मिशन शक्ति' नामक एक एकीकृत योजना का संचालन कर रहा है। इसका उद्देश्य देश भर में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ करना है।
'मिशन शक्ति' के दो प्रमुख भाग हैं: 'संबल' और 'समर्थ्य'। 'संबल' उप-योजना विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई है, जबकि 'समर्थ्य' उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
'संबल' के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर (OSC) हिंसा प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा, कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करते हैं। यह केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं के लिए एक सुरक्षित आश्रय के रूप में कार्य करते हैं।
महिला हेल्पलाइन और डिजिटल पहल
संकट में फंसी महिलाओं के लिए 181 महिला हेल्पलाइन (WHL) सेवा 24x7 उपलब्ध है। यह सेवा वर्तमान में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है और इसे आपातकालीन नंबर 112 के साथ एकीकृत किया गया है।
सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 22 जनवरी, 2025 को 'मिशन शक्ति डैशबोर्ड' लॉन्च किया है। इसके माध्यम से महिलाएं अपने निकटतम सहायता केंद्रों की जानकारी प्राप्त कर सकती हैं और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट भी बुक कर सकती हैं।
यह डिजिटल पहल महिलाओं को सरकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने का काम कर रही है। मिशन शक्ति मोबाइल ऐप के माध्यम से भी इन सेवाओं तक पहुंच को और अधिक सुगम बना दिया गया है।
निर्भया कोष और सुरक्षित शहर
महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए 'निर्भया कोष' एक समर्पित वित्तीय तंत्र के रूप में कार्य कर रहा है। यह कोष विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों को सुरक्षा परियोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
निर्भया कोष के तहत देश के 8 प्रमुख महानगरों में 'सुरक्षित नगर परियोजना' (Safe City Project) लागू की गई है। इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और लखनऊ जैसे शहर शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्क (WHD) और मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (AHTU) की स्थापना की गई है। यह कदम जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं।
न्याय प्रक्रिया में तेजी
बलात्कार और POCSO अधिनियम के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सरकार ने फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSC) की स्थापना की है। इससे पीड़ितों को समय पर न्याय मिलना सुनिश्चित हो रहा है।
राज्य फोरेंसिक प्रयोगशालाओं (SFSL) में डीएनए विश्लेषण और साइबर फोरेंसिक सुविधाओं को भी सुदृढ़ किया गया है। यह तकनीक अपराधियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संविधान के अनुसार, 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। अतः कानून व्यवस्था बनाए रखने और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जांच का प्राथमिक उत्तरदायित्व संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों का है।
भारत सरकार राज्यों को इस दिशा में हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्रदान कर रही है। 'मिशन शक्ति' और 'निर्भया कोष' जैसी योजनाएं भविष्य में महिलाओं के लिए एक भयमुक्त और सशक्त समाज के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगी।