बल्लभगढ़ | भारत के निर्माण क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। हाल ही में राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद (एनसीबी) ने देश के दिग्गज सीमेंट निर्माता, अल्ट्राटेक सीमेंट के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास की पहल: निर्माण क्षेत्र में क्रांति: एनसीबी और अल्ट्राटेक ने कौशल विकास के लिए मिलाया हाथ, लाखों श्रमिकों को मिलेगी ट्रेनिंग
राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद (एनसीबी) और अल्ट्राटेक सीमेंट ने निर्माण क्षेत्र में कौशल विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसका उद्देश्य अगले 5 वर्षों में हजारों श्रमिकों और इंजीनियरों को आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित करना है।
HIGHLIGHTS
- एनसीबी और अल्ट्राटेक सीमेंट के बीच कौशल विकास के लिए ऐतिहासिक समझौता हुआ।
- अगले 3-5 वर्षों में बड़ी संख्या में पेशेवरों और श्रमिकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
- ट्रेनिंग में सामग्री परीक्षण, कंक्रीट मिश्रण और टिकाऊ निर्माण पद्धतियां शामिल होंगी।
- यह पहल भारत सरकार के 'स्किल इंडिया मिशन' के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होगी।
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कौशल विकास की नई राह
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य निर्माण उद्योग में काम करने वाले लोगों की कार्यक्षमता और कौशल को बढ़ाना है। एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह और अल्ट्राटेक के तकनीकी सेवा प्रमुख राहुल गोयल ने बल्लभगढ़ में इस पर मुहर लगाई। डॉ. सिंह ने बताया कि इस साझेदारी से आने वाले 3 से 5 वर्षों में लाखों पेशेवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह पहल न केवल निर्माण की गुणवत्ता सुधारेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
किन्हें मिलेगा फायदा?
इस कार्यक्रम के तहत देश भर में सुनियोजित ट्रेनिंग और प्रमाणन सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसमें निम्नलिखित लोगों को शामिल किया जाएगा:
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- सिविल इंजीनियर्स और आरएमसी विशेषज्ञ
- ठेकेदार और निर्माण श्रमिक
- राजमिस्त्री और तकनीकी सहायक
प्रशिक्षण का मुख्य फोकस
ट्रेनिंग के दौरान सामग्री की गुणवत्ता की जांच, कंक्रीट मिक्स डिजाइन और टिकाऊ निर्माण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए कार्यशालाएं और साइट पर प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे। यह पूरा कार्यक्रम भारत सरकार के 'स्किल इंडिया मिशन' के अनुरूप है। इससे देश के बुनियादी ढांचे और आवास क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सहयोग से निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक का समावेश बढ़ेगा। यह न केवल समय की बचत करेगा बल्कि निर्माण को अधिक मजबूत और सुरक्षित भी बनाएगा।
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मानवेन्द्र जैतावत