मैं कुछ ही क्षण देख पाई
असहाय वृद्धों के मुख
निरूपाय कांपते गात
फिर कांप गए ये हाथ
नीलू की कविता: पालघर
संबंधित खबरें
प्राणों की भिक्षा मांगती आंखें
कैसी निरीहता कैसी कातरता
करुणा को भी करुणा हो आए
रुदन भी रोदन करने लग जाए
कितनी वीभत्सता कैसी क्रूरता
अब और कितनी होगी बर्बरता
जो ये साबित करेगी कि तुम
क्रूर हो,बर्बर हो,जाहिल हो
मैं क्षुब्ध हूं कहीं ज्यादा क्रुद्ध हूं
पर निश्शब्द हूं कंठावरूद्ध हूं
ताज़ा खबरें
"बेटों को सत्ता से दूर रखें मंत्री, नहीं तो करवा देंगे बदनामी": पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बीजेपी सरकार को घेरा, जयशंकर से मांगी माफी
जयपुर में दीक्षांत समारोह में बवाल: छात्रा ने डिप्टी सीएम के मुंह पर कहा- 'बेइज्जती करके इज्जत देने का शुक्रिया'
राजनीति
राजस्थान भाजपा की नई मीडिया टीम घोषित: मदन राठौड़ के निर्देश पर संभाग और जिला प्रभारियों की नियुक्ति, देखें पूरी लिस्ट
राजनीति
मोदी सरकार का बड़ा फैसला: राजस्थान में 1019 नए आयुष केंद्रों को मिली मंजूरी, गांव-गांव तक पहुचेंगी स्वास्थ्य सेवाएं
राजनीति