जोधपुर | राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) जोधपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'क्राफ्ट बाजार' का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को रातानाड़ा स्थित माहेश्वरी भवन में हुआ। इस कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय पारंपरिक कला को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन मोजड़ी शिल्प के नेशनल अवार्डी मोहनलाल गुर्जर, बंधेज विशेषज्ञ मोहम्मद शरीफ और पीपाड़ दाबू ब्लॉक प्रिंट के प्रसिद्ध कलाकार मोहम्मद यासीन छीपा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
देशभर के शिल्पकारों का संगम
इस विशेष आयोजन में पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए कुशल कारीगर अपनी कला का हुनर दिखा रहे हैं। यहाँ हस्तशिल्प की विविधता देखने को मिल रही है।
निफ्ट जोधपुर के निदेशक प्रो. जीएचएस प्रसाद ने बताया कि यह आयोजन हर साल कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया जाता है। इससे कारीगरों को सीधे बाजार से जुड़ने का मौका मिलता है।
प्रमुख हस्तशिल्प और मुख्य आकर्षण
विजिटर्स के लिए इस मेले में लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी, बनारस का शानदार बनारसी क्राफ्ट और पश्चिम बंगाल की पारंपरिक कान्था एंब्रॉयडरी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इन उत्पादों की फिनिशिंग देखते ही बनती है।
इसके साथ ही राजस्थान की कोटा डोरिया, पोकरण का पट्टू, चित्तौड़गढ़ का अकोला हैंड ब्लॉक प्रिंट और जयपुर के बगरू प्रिंट के स्टॉल्स पर विजिटर्स की भारी भीड़ देखी गई। लोग हस्तनिर्मित वस्तुओं में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
विद्यार्थियों के लिए विशेष गाइडेंस
शिल्प बाजार में होम और फैशन एक्सेसरीज के बेहतरीन कलेक्शन को देखकर फैशन के छात्र-छात्राएं काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने अनुभवी शिल्पकारों से कला की तकनीकी बारीकियां और बारीकियों को विस्तार से समझा।
इस प्रदर्शनी में जोधपुर का बोन एंड हॉर्न क्राफ्ट, लेदर मोजड़ी, लाख की चूड़ियां, जूट क्राफ्ट, केन एंड बैम्बू और आर्ट मेटल से बनी वस्तुएं भी उपलब्ध हैं। यहाँ हस्तशिल्प और हथकरघा का अद्भुत मेल दिखाई दे रहा है।
आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के दौरान संयुक्त निदेशक डॉ. जन्मय सिंह हाड़ा, सीएसी डॉ. अदिति मेड़तिया और सीआईसी डॉ. अंकुर सक्सेना सहित संस्थान के सभी फैकल्टी मेंबर्स मौजूद रहे। सभी ने शिल्पकारों के प्रयासों की सराहना की।
मंच का सफल संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शीतल सोनी ने किया। यह क्राफ्ट बाजार न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि यह लुप्त होती पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करने का एक सराहनीय प्रयास भी है।