नई दिल्ली | गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में 16वें इंडिया प्रोबायोटिक सिम्पोजियम का भव्य आयोजन किया गया।
सिम्पोजियम का मुख्य उद्देश्य
इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय "गट माइक्रोबायोम एंड प्रोबायोटिक्स: इम्पैक्ट फ्रॉम क्रेडल सेंटेनेरियन" रखा गया था। नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने अपने संबोधन में प्रतिरक्षा तंत्र, चयापचय और निवारक स्वास्थ्य देखभाल में गट माइक्रोबायोम की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया।
आहार व्यवहार में चिंताजनक बदलाव
श्री गौबा ने देश में खान-पान की आदतों में आ रहे तेजी से बदलाव पर गहरी चिंता व्यक्त की और इसे स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया। शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण लोग पारंपरिक पोषक तत्वों से भरपूर आहार को छोड़कर प्रोसेस्ड फूड की ओर बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा प्रचारित अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं।
बीमारियों का मुख्य कारण
उन्होंने चेतावनी दी कि इन प्रवृत्तियों के गट स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनेंगे। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में 56.4% बीमारियों का अनुमानित कारण केवल अस्वास्थ्यकर या असंतुलित आहार ही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सूक्ष्मजीवों के असंतुलन से व्यापक स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
आर्थिक विकास और स्वास्थ्य
श्री गौबा ने स्वास्थ्य सेवा को व्यक्तिगत कल्याण के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी युवा आबादी का जनसांख्यिकीय लाभ तभी मिल सकता है, जब हमारा कार्यबल पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम हो। बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए अभी से सक्रिय और स्वस्थ वृद्धावस्था की तैयारी करना देश की प्राथमिकता होनी चाहिए।
विकसित भारत का संकल्प
नीति आयोग के सदस्य ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में किया गया हर निवेश वास्तव में 'विकसित भारत' के निर्माण में निवेश है। सरकार की आयुष्मान भारत और पीएम-जेएवाई जैसी योजनाओं ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सुरक्षा को नया आधार प्रदान किया है। पीएम भारतीय जनऔषधि परियोजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसी पहल जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बना रही हैं।
वित्तीय बोझ में कमी
वित्त वर्ष 2015 से 2022 के बीच स्वास्थ्य पर होने वाले व्यक्तिगत खर्च में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। जेब से होने वाला खर्च 62.6% से घटकर 39.4% हो गया है, जिससे भारतीय परिवारों को 1.25 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच, गुणवत्ता और पेशेवरों की कमी जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
तकनीक और नवाचार का महत्व
श्री गौबा ने स्वास्थ्य पेशेवरों से अपील की कि वे जेनेरिक दवाओं और डिजिटल स्वास्थ्य उपकरणों का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करें। टेलीमेडिसिन, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए वंचित समुदायों तक विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल पहुंचाई जा सकती है। प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में हो रहे वैज्ञानिक शोध अब वर्णनात्मक अध्ययनों से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुप्रयोगों की ओर बढ़ रहे हैं।
भविष्य की चिकित्सा पद्धतियां
माइक्रोबायोम विज्ञान में सिंथेटिक बायोलॉजी और सीआरआईएसपीआर (CRISPR) जैसी तकनीकों का उपयोग अगली पीढ़ी के उपचारों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। इन तकनीकों की मदद से विशिष्ट सूजनरोधी और चयापचय कार्यों वाले प्रोबायोटिक उपभेदों का निर्माण किया जा रहा है जो सटीक चिकित्सा में सहायक हैं। हालांकि, उन्होंने प्रोबायोटिक बाजार में गलत सूचनाओं और भ्रामक विज्ञापनों के बढ़ते प्रसार के प्रति शोधकर्ताओं को सचेत भी किया।
भारत का पारंपरिक ज्ञान
भारत के पास किण्वित खाद्य पदार्थों (Fermented Foods) और पारंपरिक आहार पद्धतियों की एक अत्यंत समृद्ध और प्राचीन विरासत उपलब्ध है। देश अपने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीनोमिक अनुसंधान के साथ मिलाकर वैश्विक प्रोबायोटिक आंदोलन का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। वैज्ञानिक प्रगति को सुरक्षित और प्रभावी उत्पादों में बदलने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग और नियामकों के बीच सहयोग अनिवार्य है।
युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन
श्री गौबा ने सिम्पोजियम में शामिल युवा शोधकर्ताओं की सराहना की और उन्हें जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने को कहा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन नए वैज्ञानिक सहयोगों को जन्म देगा और इस क्षेत्र में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। अंत में, उन्होंने निवारक जीवनशैली को बढ़ावा देने की अपील की ताकि भविष्य में महंगी चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता को कम किया जा सके।