शख्सियत

कैंसर से जूझते हुए भी जिंदादिली की मिसाल बनी प्रियंका कुंवर

प्रदीप बीदावत · 08 सितम्बर 2025, 11:18 दोपहर
प्रियंका, जिसकी उम्र महज 27 साल थी, पिछले दो साल से कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से लड़ रही थी। पूरा शरीर दर्द से जकड़ा हुआ था, मशीनों से बंधा हुआ जीवन, लेकिन फिर भी

जालोर। आमतौर पर आपने लोगों को जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ या किसी अन्य खुशी के मौके पर ही केक काटते हुए देखा होगा। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जो आपके दिल को झकझोर देगी—यह कहानी है प्रियंका कुंवर उर्फ़ पीहू की।

प्रियंका, जिसकी उम्र महज 27 साल थी, पिछले दो साल से कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से लड़ रही थी। पूरा शरीर दर्द से जकड़ा हुआ था, मशीनों से बंधा हुआ जीवन, लेकिन फिर भी चेहरे पर हमेशा मुस्कान। यही उनकी असली पहचान और जिंदादिली की सबसे बड़ी मिसाल थी।

अंतिम सांसों से पहले भी मुस्कान और जश्न

उदयपुर के एक निजी अस्पताल में जब डॉक्टरों ने हालात को देखते हुए हाथ खड़े कर दिए, तब पीहू ने अपने पूरे परिवार से एक आखिरी इच्छा जताई—"मैं केक काटना चाहती हूं।"

उनकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए परिवार ने ICU को सजाया, केक मंगवाया और पीहू को बच्चों की तरह खुश करने की कोशिश की। उस कठिन घड़ी में भी पीहू ने मुस्कुराकर केक काटा और जिंदगी को आखिरी पल तक जीने का संदेश दिया।

प्रियंका उर्फ़ पीहू का जीवन परिचय

प्रियंका कुंवर उर्फ़ पीहू का जन्म 17 फरवरी 1998 को जालोर जिले के पचानवा गांव (हरजी के पास) में हुआ।
चार भाई-बहनों में वह अपने भाई से बड़ी और दोनों बहनों से छोटी थीं।

उनके पिता नरपतसिंह बताते हैं कि पीहू बचपन से ही अत्यंत होशियार और जिम्मेदार स्वभाव की थीं।

कठिनाइयों के बावजूद साहस की मिसाल

डॉक्टरों और परिजनों के अनुसार, कैंसर से जूझते हुए भी पीहू के चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। उन्होंने अपने साहस और धैर्य से सबको प्रेरित किया। यही कारण है कि उनके निधन पर परिजनों और रिश्तेदारों के साथ-साथ अस्पताल का पूरा स्टाफ भी भावुक होकर रो पड़ा।

इलाज की लंबी जद्दोजहद

विवाह के कुछ ही समय बाद पीहू को पैरों में दर्द होने लगा। शुरुआत में इसे सामान्य समझकर दवाइयाँ और फिजियोथेरेपी कराई गई, लेकिन जब राहत नहीं मिली तो एमआरआई में स्पाइन (कमर) में गांठ का पता चला।

मार्च 2023 में पहली सर्जरी हुई। जांच में Ewing Sarcoma (एक दुर्लभ कैंसर) की पुष्टि हुई। इसके बाद—

इन सभी प्रयासों के बावजूद पीहू को स्थायी राहत नहीं मिल सकी।

जिंदादिली की अमर याद

प्रियंका कुंवर उर्फ़ पीहू आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी जिंदादिली, उनकी मुस्कान और उनका साहस हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।

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