वैज्ञानिक भाषा है संस्कृत
संस्कृत भाषा का विश्व में एक अलग ही महत्व है, इसीलिए सभी को इस वैज्ञानिक भाषा मे पारंगत होकर अपने जीवन में इसका प्रयोग करना चाहिए।
हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक संस्कृत से हमारा नाता है। संस्कृत भाषा का मतलब ही है हमारे व्यक्तित्व को निखारना। इसके लिए हमें महर्षि पतंजलि का योग दर्शन शास्त्र पढऩा चाहिए। कोरोना काल के बाद अमेरिका में कई संस्कृत विश्वविद्यालय(Sanskrit University) प्रारंभ हुए, वहां लोगों को संस्कृत सिखाई जाती है।मुख्य वक्ता प्रांत संपर्क प्रमुख विजय तिवारी ने कहा हमारा संबंध संस्कृत भाषा से है। संस्कृत भारती जिला संरक्षक(Sanskrit Bharati District Patron) दुर्गाशंकर श्रीवास्तव ने कहा कि संस्कृत एक वैज्ञानिक और देव भाषा है। सभी को प्रतिदिन कम से कम कुछ समय संस्कृत भाषा का अभ्यास करना चाहिए अथवा संस्कृत बोलने का प्रयास करना चाहिए। संस्कृत भारती के जिलाध्यक्ष डॉ. केके(KK) चतुर्वेदी ने सभी से आह्वान किया कि वे संस्कृत भाषा में पारंगत हों। कार्यक्रम में जिला गीता केंद्र प्रभारी कल्पना हेडाऊ ने गीता के श्लोकों का सस्वर(recitation) वाचन किया। जिला महिला प्रमुख संस्कृत भारती सरिता आंधवान ने मधुर गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन संस्कृत भारती विभाग संयोजक अखिलेश श्रीवास्तव ने संस्कृत भाषा में किया। बताया कि 1 जून से 9 जून तक कटनी में संस्कृत भारती का प्रबोधन वर्ग(enlightenment class) लगाया जा रहा है। जिसमें भाग लेकर कोई भी व्यक्ति संस्कृत भाषा में पारंगत हो सकता है। उन्होंने आमंत्रित किया कि अधिक से अधिक लोग वर्ग मे सम्मिलित हों। कार्यक्रम में ताराचंद मिश्रा, मुकुंद पांडे, अश्विनी तिवारी, विजय शुक्ला, दीपक श्रीवास्तव, सौरभ सनोडिया, सरिता आंधवान, कल्पना हेडाऊ, घनश्याम मेहरा व महाविद्यालय के शिक्षक, छात्र एवं नागरिक उपस्थित रहे।