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राजस्थान: 6000 MW बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट: राजस्थान में 6000 मेगावाट की बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं: ऊर्जा मंत्री ने सितंबर 2026 तक पूरा करने के दिए निर्देश

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

राजस्थान सरकार प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में 6000 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) पर तेजी से काम कर रही है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इन परियोजनाओं को सितंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान में 6000 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
  • ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने सभी परियोजनाओं को सितंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।
  • समय से पूर्व कार्य पूरा करने वाले डेवलपर्स को राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।
  • इन परियोजनाओं से ग्रिड स्थिरता और पीक डिमांड के दौरान सस्ती बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
rajasthan 6000 mwh battery energy storage system deadline 2026

जयपुर | राजस्थान सरकार ने प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर ने जयपुर के विद्युत भवन में 6000 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।

इस उच्च स्तरीय बैठक में ऊर्जा विभाग और विभिन्न विद्युत निगमों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ बीईएसएस परियोजनाओं के डेवलपर्स भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री का विजन और समय सीमा

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के दिशा-निर्देशन में राज्य सरकार राजस्थान को देश का प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र बनाने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने डेवलपर्स को सख्त निर्देश दिए कि सभी बीईएसएस परियोजनाएं आगामी रबी सीजन से पहले यानी सितंबर 2026 तक हर हाल में स्थापित हो जानी चाहिए।

मंत्री ने यह भी घोषणा की कि जो डेवलपर्स अपनी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा से पहले पूरा करेंगे, उन्हें राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा।

परियोजनाओं की प्रगति और चुनौतियां

बैठक के दौरान परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं जैसे भूमि उपलब्धता, ग्रिड कनेक्टिविटी और वित्तीय समापन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

ऊर्जा मंत्री ने डेवलपर्स को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी ताकि सभी कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने में डेवलपर्स की मदद करें और सभी स्वीकृतियां जल्द दिलाएं।

ग्रिड स्थिरता और सस्ती बिजली

शासन सचिव (ऊर्जा) सुश्री आरती डोगरा ने बताया कि ये परियोजनाएं केंद्र सरकार की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित की जा रही हैं।

इन परियोजनाओं के लिए टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी निविदाएं आमंत्रित की गई थीं, जिसमें राजस्थान को पूरे देश में सबसे न्यूनतम दरें प्राप्त करने में सफलता मिली है।

प्राप्त दरों के अनुसार, यह शुल्क 1.77 लाख रुपये से 2.85 लाख रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह के बीच है, जो राज्य के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

विभिन्न चरणों का विवरण

बीईएसएस परियोजनाओं को विभिन्न घटकों में विभाजित किया गया है, जिसमें स्टेट कंपोनेंट और सेंट्रल कंपोनेंट के तहत 1000-1000 मेगावाट ऑवर की परियोजनाएं शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, पीएसडीएफ योजना के तहत 2000 मेगावाट ऑवर (2 घंटे 2 साइकिल) और 2000 मेगावाट ऑवर (4 घंटे 1 साइकिल) के कार्यादेश भी जारी किए गए हैं।

इन प्रणालियों के स्थापित होने से राज्य में बिजली की पीक डिमांड के दौरान सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी और ग्रिड भी स्थिर रहेगा।

अधिकारियों की उपस्थिति

समीक्षा बैठक में ऊर्जा सलाहकार श्री नवीन अरोड़ा, आरआरईसी के सीएमडी श्री रोहित गुप्ता और ऊर्जा विकास निगम के एमडी श्री ओम प्रकाश कसेरा उपस्थित रहे।

साथ ही संयुक्त सचिव श्री सौरभ स्वामी, उत्पादन निगम के सीएमडी श्री देवेंद्र श्रृंगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी परियोजना की तकनीकी बारीकियों पर चर्चा की।

इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से राजस्थान की ऊर्जा अवसंरचना सुदृढ़ होगी और राज्य भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकेगा।

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