बीकानेर | राजस्थान के प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी स्कूलों, विशेषकर महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग ने पूर्व प्राथमिक शिक्षा यानी बाल वाटिकाओं के ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए करीब 2500 एल-5 पदों को समाप्त करने का आदेश जारी किया है।
बाल वाटिका में 2500 पद खत्म: राजस्थान बाल वाटिका स्कूलों में 2500 पद खत्म, अब प्रमोशन से भरेंगे 2410 पद, देखें जिलेवार लिस्ट
राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने बाल वाटिका स्कूलों के ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। विभाग ने 2500 पदों को समाप्त कर 2410 पदों को पदोन्नति से भरने का निर्णय लिया है।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने पूर्व प्राथमिक शिक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए 2500 पदों को समाप्त कर दिया है।
- महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की बाल वाटिकाओं में अब 2410 पदों को प्रमोशन के जरिए भरा जाएगा।
- नामांकन के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति होगी, जहां 75 बच्चों पर अधिकतम दो शिक्षक तैनात किए जाएंगे।
- जयपुर में सर्वाधिक 120 और सीकर में 63 पदों की स्वीकृति दी गई है, जबकि नए सत्र के लिए सर्वे शुरू हो गया है।
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पदों का नया गणित और प्रमोशन की तैयारी
विभागीय आदेशों के अनुसार, इन समाप्त किए गए पदों के स्थान पर अब 2410 पदों को पदोन्नति (प्रमोशन) के माध्यम से भरने की स्वीकृति दी गई है। इस बदलाव का सीधा असर नई भर्तियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, क्योंकि अब इन पदों पर सीधी भर्ती के बजाय विभागीय पदोन्नति को प्राथमिकता दी जाएगी।
छात्र संख्या के आधार पर होगी शिक्षकों की नियुक्ति
विभाग ने बाल वाटिकाओं में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नए मानक तय किए हैं। प्रावधानों के तहत, जिन स्कूलों में बच्चों का नामांकन 75 तक होगा, वहां अधिकतम दो पूर्व प्राथमिक शिक्षक लगाए जाएंगे। यदि नामांकन 75 से अधिक होता है, तो प्रत्येक अतिरिक्त 25 बच्चों पर एक और शिक्षक का पद सृजित किया जाएगा।
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प्रमुख जिलों में स्वीकृत पदों की संख्या
विभागीय सूची के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदों का आवंटन कर दिया गया है। जयपुर में सबसे अधिक 120 पद स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा सीकर में 63, चुरू में 54, बीकानेर में 51, झुंझुनूं में 50 और जोधपुर में 21 पदों को मंजूरी दी गई है। जैसलमेर में 7 और सलूंबर में 6 पद स्वीकृत हुए हैं।
नामांकन बढ़ाने के लिए घर-घर पहुंच रहे शिक्षक
एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र को लेकर शिक्षा विभाग अलर्ट मोड पर है। स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए 'हाउस होल्ड सर्वे' शुरू कर दिया गया है। शिक्षक घर-घर जाकर ड्रॉप आउट बच्चों को चिन्हित कर रहे हैं।
शिक्षकों का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को सरकारी स्कूलों की योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी देना है। विभाग का लक्ष्य निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित न रहे।
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मानवेन्द्र जैतावत