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राजस्थान में आज 1 घंटे का ब्लैकआउट!: Earth Hour 2026: राजस्थान में आज रात 1 घंटे के लिए रहेगा 'ब्लैकआउट', राज्यपाल ने की लाइटें बंद करने की अपील

मानवेन्द्र जैतावत · 28 मार्च 2026, 05:06 सुबह
राजस्थान आज रात 8:30 से 9:30 बजे तक 'अर्थ ऑवर' मनाएगा। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदेशवासियों से गैर-जरूरी लाइटें बंद करने का आह्वान किया है।

जयपुर | पूरी दुनिया के साथ-साथ आज राजस्थान भी एक अनोखे और ऐतिहासिक अंधेरे का गवाह बनने जा रहा है। जब घड़ी की सुइयां रात के 8.30 बजाएंगी, तो प्रदेश के प्रमुख शहरों में सन्नाटा पसर जाएगा।

यह अंधेरा किसी तकनीकी खराबी या बिजली कटौती का परिणाम नहीं है। बल्कि यह धरती को बचाने के लिए राजस्थान के नागरिकों द्वारा लिया गया एक बड़ा संकल्प है। यह पर्यावरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अर्थ ऑवर डे: राजस्थान का संकल्प

शनिवार की रात राजस्थान के लिए विशेष होने वाली है। दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरण अभियान 'अर्थ ऑवर डे' के अवसर पर आज पूरा प्रदेश एकजुट होगा। इस मुहिम का उद्देश्य ऊर्जा बचाना है।

इस अभियान के तहत आज रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक बिजली उपकरणों को विश्राम दिया जाएगा। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने इस मुहिम में हिस्सा लेने की मार्मिक अपील की है। उन्होंने इसे भविष्य का निवेश बताया है।

राज्यपाल ने कहा है कि यह पहल राजस्थान को पर्यावरण सुरक्षा के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी। ऊर्जा की बचत ही आने वाले कल की सुरक्षा है। इसमें हर नागरिक की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

60 मिनट का 'ब्लैकआउट' और लोकभवन

आज शनिवार रात जैसे ही 'अर्थ ऑवर' शुरू होगा, जयपुर स्थित लोकभवन की सभी गैर-जरूरी लाइटें बंद कर दी जाएंगी। राज्यपाल ने स्वयं इसकी निगरानी करने का निर्णय लिया है। वे स्वयं इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं और अनिवार्य लाइटें ही चालू रहेंगी। सजावटी लाइट्स और फालतू चल रहे विद्युत उपकरणों को पूरी तरह बंद रखा जाएगा। यह एक प्रतीकात्मक लेकिन बहुत शक्तिशाली कदम माना जा रहा है।

यह सांकेतिक ब्लैकआउट संदेश देता है कि हम जलवायु परिवर्तन के खतरों के प्रति सजग हैं। एक घंटे का त्याग करोड़ों यूनिट बिजली बचाने में सहायक हो सकता है। इससे कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी।

राज्यपाल की भावुक अपील

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह महज एक घंटे की कटौती नहीं है। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित निवेश है। हमें प्रकृति का सम्मान करना सीखना होगा।

उन्होंने कहा, "एक घंटे के लिए लाइटें बंद रखकर हम सामूहिक तौर पर ऊर्जा संरक्षण की दिशा में पहल करेंगे। पर्यावरण संरक्षण हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।" राज्यपाल ने राजस्थान की जनता से सहयोग की अपेक्षा की है।

राज्यपाल ने हर राजस्थानी से इस वैश्विक महायज्ञ में अपनी आहुति देने का आह्वान किया है। उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों से सहयोग मांगा है। यह एकता ही पर्यावरण को बचाने में सक्षम होगी।

क्या है 'अर्थ ऑवर' का महत्व?

'अर्थ ऑवर' का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों को जागरूक करना है। वर्ल्ड वाइड फंड (WWF) द्वारा इसकी शुरुआत सिडनी से की गई थी। आज यह दुनिया का सबसे बड़ा जन आंदोलन बन चुका है।

आज यह अभियान वैश्विक रूप ले चुका है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि बिजली उत्पादन का पर्यावरण पर कितना गहरा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कोयले और गैस से बिजली बनाने में प्रदूषण होता है।

जब हम बिजली बचाते हैं, तो हम सीधे तौर पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करते हैं। यह छोटे-छोटे कदम ही भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बनते हैं। जागरूकता ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।

ऐतिहासिक स्मारकों पर दिखेगा असर

राजस्थान अपनी विरासत के लिए जाना जाता है। आज रात जयपुर के आमेर फोर्ट, हवामहल और जलमहल जैसे ऐतिहासिक स्मारकों पर भी लाइटें बंद रखी जाएंगी। यह दृश्य पर्यटकों के लिए भी कौतूहल का विषय होगा।

यह न केवल स्थानीय लोगों बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी एक मजबूत संदेश देगा। राजस्थान सौर ऊर्जा उत्पादन में पहले से ही देश में अग्रणी राज्य बना हुआ है। अब बचत के मामले में भी हम मिसाल पेश करेंगे।

अब ऊर्जा की बचत के मामले में भी प्रदेश अपनी सक्रियता दिखा रहा है। यह मरुधरा के सजग नागरिकों की पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा। राजस्थान की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

आमजन कैसे बन सकते हैं हिस्सा?

इस मुहिम का हिस्सा बनना बहुत सरल है। राज्यपाल ने अपील की है कि आज रात हर घर और शोरूम में कम से कम एक घंटे लाइट बंद रखें। आप अपने घर की गैर-जरूरी लाइटें बंद कर योगदान दे सकते हैं।

लोग इस समय का उपयोग अपने परिवार के साथ बातचीत करने में कर सकते हैं। मोमबत्ती के उजाले में बैठकर डिजिटल डिटॉक्स का आनंद लिया जा सकता है। यह समय अपनों के साथ बिताने का एक जरिया भी बनेगा।

बिना गैजेट्स और बिजली के बिताया गया यह एक घंटा मानसिक शांति भी प्रदान करेगा। यह प्रकृति के साथ फिर से जुड़ने का एक बेहतरीन अवसर है। हमें गैजेट्स की दुनिया से बाहर निकलकर सोचना चाहिए।

ऊर्जा संरक्षण: समय की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर नागरिक बिजली की बर्बादी रोके, तो ऊर्जा संकट को टाला जा सकता है। राजस्थान जैसे राज्य में इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। जल और ऊर्जा का संरक्षण ही हमारा मूल मंत्र होना चाहिए।

अर्थ ऑवर डे केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। इसे हमें अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है ताकि पर्यावरण संतुलित रहे। हमें हर दिन बिजली बचाने का प्रयास करना चाहिए।

आज रात का यह एक घंटा राजस्थान के इतिहास में पर्यावरण के प्रति प्रेम के रूप में दर्ज होगा। आइए, हम सब मिलकर इस मुहिम को सफल बनाएं और अपनी धरती को बचाएं। आज का अंधेरा कल के उजाले की गारंटी है।

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