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राजस्थान: मेड़ता-पुष्कर रेल प्रोजेक्ट: राजस्थान में 800 करोड़ की मेड़ता-पुष्कर रेल लाइन का काम शुरू, अश्विनी वैष्णव ने पेश किया राज्य में रेलवे के विकास का पूरा खाका

मानवेन्द्र जैतावत · 28 मार्च 2026, 04:29 सुबह
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान में 800 करोड़ की मेड़ता-पुष्कर रेल परियोजना के शुभारंभ की पुष्टि की है। राज्य के रेल बजट में 15 गुना की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है जिससे बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।

जयपुर | केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान में रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि राज्य में 800 करोड़ रुपये की लागत से मेड़ता-पुष्कर रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है।

मेड़ता-पुष्कर रेल लाइन: एक नई शुरुआत

51 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन परियोजना को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के लिए 'विशेष रेल परियोजना' के रूप में घोषित किया गया है। सरकार ने इस परियोजना के लिए सक्षम प्राधिकारी को नामित कर दिया है और भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक अधिनिर्णय भी प्रकाशित किया जा चुका है। मेड़ता और पुष्कर के बीच इस नई रेल लिंक से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

रेल बजट में 15 गुना की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

राजस्थान में रेल बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित बजट में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। मंत्री ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि साल 2009-14 के दौरान राजस्थान को प्रति वर्ष औसतन केवल 682 करोड़ रुपये का बजट मिलता था। इसके विपरीत, वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का रेल बजट बढ़कर लगभग 9,960 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले औसत की तुलना में लगभग 15 गुना अधिक है।

रेलपथ निर्माण की गति में सुधार

बजट के साथ-साथ राजस्थान में नई रेल पटरियां बिछाने की गति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2009-14 के दौरान राजस्थान में प्रति वर्ष औसतन 159.60 किमी रेलपथ कमीशन किया जाता था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 346.82 किमी प्रति वर्ष हो गया है, जो कि दो गुना से भी अधिक की वृद्धि है। यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार राजस्थान की कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दे रही है।

स्वीकृत परियोजनाओं का व्यापक जाल

1 अप्रैल 2025 की स्थिति के अनुसार, राजस्थान में कुल 43,918 करोड़ रुपये की लागत वाली 28 रेल परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 3,409 किलोमीटर है। इनमें 13 नई रेल लाइनें, 5 आमान परिवर्तन (गेज कन्वर्जन) और 10 दोहरीकरण की परियोजनाएं शामिल हैं। अब तक इन कार्यों पर 18,954 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और 1,238 किमी रेलपथ कमीशन किया जा चुका है।

हाल ही में पूरी हुई प्रमुख परियोजनाएं

राजस्थान में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पूरे किए गए हैं। इनमें 896 करोड़ की लागत वाला सूरतपूड़ा-श्रीगंगानगर आमान परिवर्तन और 1,105 करोड़ की लागत वाला जयपुर-चुरू एवं सीकर-लोहारू आमान परिवर्तन शामिल है। इसके अलावा, बीना-कोटा दोहरीकरण (2,476 करोड़) और फुलेरा-डेगाना दोहरीकरण (702 करोड़) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने राज्य में ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बना दिया है।

वर्तमान में जारी महत्वपूर्ण कार्य

वर्तमान में राज्य में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें तरंगा हिल-आबू रोड नई लाइन (2,798 करोड़), रामगंजमंडी-भोपाल नई लाइन (5,073 करोड़) और मथुरा-झांसी तीसरी लाइन (5,924 करोड़) प्रमुख हैं। इसके अलावा, रींगस-खाटू श्याम जी और रामदेवरा-पोखरण जैसी नई लाइनों पर भी काम जारी है, जो श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को बेहद आसान बना देंगी।

सर्वेक्षण और भविष्य की योजनाएं

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, पिछले तीन वर्षों और चालू वित्त वर्ष के दौरान राजस्थान में 5,666 किमी लंबाई के कुल 59 नए सर्वेक्षणों को मंजूरी दी गई है। इनमें 25 नई लाइनें और 34 दोहरीकरण के कार्य शामिल हैं। किसी भी नई परियोजना की स्वीकृति यातायात अनुमान, लाभप्रदता, कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक महत्व जैसे कई कड़े मानदंडों पर निर्भर करती है।

चुनौतियां और विकास के लाभ

रेल परियोजनाओं को पूरा करने में कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, वन विभाग की मंजूरी, और भौगोलिक परिस्थितियां शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल माल और सेवाओं का परिवहन तेज होगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों में भी भारी इजाफा होगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राजस्थान की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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