कचौड़ी गली सून कइलs बलमू - पांचवीं किश्त
शेड्स बहुरंगी हैं, लिहाजा विषयांतर भी संभव है क्योंकि कंठ स्वरों में फूटे किस्से एक दिन में खतम नहीं होते। यह वह इतिहास है जो शताब्दियों चलता है और जि...
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शेड्स बहुरंगी हैं, लिहाजा विषयांतर भी संभव है क्योंकि कंठ स्वरों में फूटे किस्से एक दिन में खतम नहीं होते। यह वह इतिहास है जो शताब्दियों चलता है और जि...
पहले पटना सिर्फ पटना हुआ करता था और मुद्दतों सिर्फ पटना ही रहा। दानापुर,फुलवारी, मनेर, सिटी, कुम्हरार, फतुहा, बिहटा, कुल...
उस बुलडोजर की अपनी कोई आवाज़ नहीं होती। कोई भोंपू, कोई मुनादी, कोई डुगडुगी पार्टी नहीं हुआ करती है उसके साथ। तो.. ऐसा ही...
इसका नाम कचौड़ी गली क्यों पड़ गया? किसने इसे यह नाम दिया और दिया तो फिर पुराना नाम गायब क्यों हो गया? सरकारी दस्तावेज तक...
बूढ़ों के पास निपढ़ औरतों के इस सवाल का कोई जवाब नहीं होता। वे झींकते हैं। वे खीझते हैं। वे अपनी चुप्पी पर सिर खुजाते है...