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टेली-लॉ: न्याय के लिए नई डिजिटल पहल: विज्ञान भवन में टेली-लॉ राष्ट्रीय परामर्श 2026: उपराष्ट्रपति करेंगे 'न्याय सेतु' AI चैटबॉट और मैस्कॉट का ऐतिहासिक शुभारंभ

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

न्याय विभाग 29 मार्च को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में टेली-लॉ पहल के तहत एक भव्य राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन कर रहा है। इस कार्यक्रम में 'न्याय सेतु' AI चैटबॉट सहित कई तकनीकी नवाचारों का अनावरण किया जाएगा।

HIGHLIGHTS

  • उपराष्ट्रपति श्री सी.पी.राधाकृष्‍णन विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
  • कानूनी सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए 'न्याय सेतु' नामक AI-संचालित चैटबॉट और एक आधिकारिक मैस्कॉट का अनावरण होगा।
  • 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्थानीय कलाकारों द्वारा एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी जाएगी।
  • कार्यक्रम में 1200 से अधिक हितधारक, जिनमें कानूनी विशेषज्ञ और ग्राम स्तरीय उद्यमी शामिल हैं, भाग लेंगे।
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नई दिल्ली | भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय का न्याय विभाग आगामी 29 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम की मेजबानी करने जा रहा है। विज्ञान भवन में आयोजित होने वाला यह 'राष्ट्रीय परामर्श 2026' टेली-लॉ पहल के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रौद्योगिकी के माध्यम से कानूनी सेवाओं को सुलभ बनाना और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। यह परामर्श 'दिशा' (DISHA) योजना के व्यापक ढांचे के तहत आयोजित किया जा रहा है।

मुख्य अतिथि और विशिष्ट गरिमा



इस भव्य समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी.राधाकृष्‍णन मुख्य अतिथि के रूप में शोभा बढ़ाएंगे। उनके साथ विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल विशिष्ट अतिथि होंगे।

यह परामर्श विभाग के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जो सूचित विचार-विमर्श और नीतिगत संवाद के माध्यम से न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए किए जा रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन के साथ होगी।

सांस्कृतिक गौरव: वंदे मातरम के 150 वर्ष



इस वर्ष का परामर्श विशेष है क्योंकि इसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। स्थानीय कलाकार इस गीत की प्रस्तुति देकर इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करेंगे।

न्याय विभाग के सचिव अपने स्वागत भाषण में इस परामर्श के व्यापक संदर्भ और लक्ष्यों को स्पष्ट करेंगे। इसके बाद उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का औपचारिक अभिनंदन किया जाएगा, जो कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाएगा।

न्याय सेतु: एआई चैटबॉट और मैस्कॉट



इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण 'न्याय सेतु' नामक एआई-संचालित चैटबॉट का शुभारंभ होगा। इसे नागरिकों और कानूनी सेवाओं के बीच एक डिजिटल सेतु के रूप में विकसित किया गया है।

यह चैटबॉट उपयोगकर्ताओं को उनके कानूनी अधिकारों को समझने और विवाद समाधान तंत्रों तक पहुँचने में मदद करेगा। इसके साथ ही 'न्याय सेतु' मैस्कॉट का भी अनावरण किया जाएगा, जो सुलभ न्याय का प्रतीक बनेगा।

मैस्कॉट का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और डिजिटल रूप से वंचित आबादी के बीच कानूनी जागरूकता फैलाना है। यह जटिल कानूनी अवधारणाओं को सरल बनाकर लोगों में डिजिटल सेवाओं के प्रति विश्वास पैदा करेगा।

लाभार्थियों की आवाज और ज्ञान उत्पाद



कार्यक्रम के दौरान 'लाभार्थियों की आवाज' पुस्तिका 2025-26 का विमोचन किया जाएगा। इसमें उन व्यक्तियों की प्रेरक कहानियाँ हैं, जिन्हें टेली-लॉ सेवाओं से नया जीवन और न्याय मिला है।

इसके अलावा, एक तकनीकी श्वेत पत्र भी प्रकाशित किया जाएगा। इसमें विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की सिफारिशें शामिल हैं, जो भविष्य में टेली-लॉ सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए रणनीतिक दिशा प्रदान करेंगी।

कानूनी साक्षरता और कॉमिक पुस्तकें



युवाओं को कानूनी रूप से सशक्त बनाने के लिए दिल्ली राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) के सहयोग से तैयार कॉमिक पुस्तकों का विमोचन होगा। ये पुस्तकें रोचक कहानियों के माध्यम से जटिल कानून समझाएंगी।

इन कॉमिक्स का उद्देश्य कानूनी अधिकार, न्याय तक पहुंच और विवाद समाधान जैसे विषयों को समावेशी प्रारूप में प्रस्तुत करना है। यह विशेष रूप से पहली बार कानूनी सेवा लेने वालों के लिए उपयोगी होगा।

जमीनी स्तर पर प्रभाव की समीक्षा



समारोह में 'दिशा' योजना की प्रगति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें टेली-लॉ पैनल के वकीलों और ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) के साथ सीधी बातचीत का सत्र भी शामिल होगा।

यह सत्र प्रौद्योगिकी-सक्षम कानूनी सहायता के जमीनी स्तर पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव को प्रदर्शित करेगा। दिल्ली के विधि महाविद्यालयों द्वारा दी जा रही नि:शुल्क सेवाओं पर भी एक विशेष चर्चा की जाएगी।

व्यापक जनभागीदारी और भविष्य की राह



इस परामर्श में लगभग 1200 प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें सुप्रीम कोर्ट ई-कमेटी, नालसा के सदस्य, सरकारी वकील और प्रमुख विधि संस्थानों के छात्र और संकाय सदस्य शामिल होंगे।

देश भर के विभिन्न हितधारक ऑनलाइन माध्यम से भी इस महत्वपूर्ण चर्चा से जुड़ेंगे। यह आयोजन भारत सरकार की न्याय व्यवस्था में व्याप्त असमानता को दूर करने की प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रमाण है।

अंत में, मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि अपने संबोधन में डिजिटल नवाचार और शासन सुधारों के माध्यम से न्याय की व्यापक परिकल्पना साझा करेंगे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और हाई टी के साथ होगा।

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