नई दिल्ली |
पश्चिम एशिया संकट: भारत की तैयारी: पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा कदम: उर्वरक और ईंधन की आपूर्ति रहेगी निर्बाध, नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि उर्वरक, ईंधन और ऊर्जा की कोई कमी नहीं होगी। सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं और खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है।
HIGHLIGHTS
- भारत सरकार ने खरीफ सीजन के लिए 180 लाख टन उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया है।
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता के लिए उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती की गई है।
- पश्चिम एशिया से अब तक 5.5 लाख से अधिक भारतीय नागरिक सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।
- कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में 2,500 से अधिक छापे मारे गए और 2,000 सिलेंडर जब्त किए गए।
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पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में उपजी भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत सरकार ने अपनी तैयारियों को लेकर देश को आश्वस्त किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में उर्वरक, ईंधन और ऊर्जा संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में पेट्रोलियम, विदेश, पत्तन और उर्वरक मंत्रालयों के अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी साझा की। सरकार का मुख्य ध्यान घरेलू स्थिरता और विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा पर है।
उर्वरक उपलब्धता और किसानों के लिए राहत
रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने जानकारी दी कि आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए देश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। किसानों को किसी भी प्रकार की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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सरकार के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख टन होने का अनुमान है। इसके मुकाबले वर्तमान में देश के पास 180 लाख टन का विशाल भंडार उपलब्ध है, जो पिछले साल के 147 लाख टन से काफी अधिक है।
खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए उर्वरक आयात का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यूरिया का लगभग 20-30 प्रतिशत और डीएपी का 30 प्रतिशत आयात इसी क्षेत्र से होता है। तनाव के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।
यूरिया उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग होने वाली एलएनजी का 50 प्रतिशत आयात भी इसी क्षेत्र से होता है। सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से यूरिया इकाइयों को गैस की आपूर्ति 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक कर दी है।
आयात स्रोतों में विविधता और वैश्विक समन्वय
सरकार ने उर्वरक आयात के लिए केवल एक क्षेत्र पर निर्भर न रहकर अपने स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई है। इसके लिए रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और कनाडा जैसे देशों से संपर्क साधा गया है।
रूस से केप ऑफ गुड होप मार्ग के माध्यम से लगभग 28 लाख टन माल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा सऊदी अरब के साथ पांच वर्षों के लिए प्रति वर्ष 31.10 लाख टन डीएपी की दीर्घकालिक व्यवस्था की गई है।
उर्वरक विभाग ने वैश्विक मूल्य रुझानों पर नजर रखने के लिए एक समर्पित कार्य समूह और एक आपातकालीन निगरानी कक्ष का गठन किया है। यह कक्ष चौबीसों घंटे सातों दिन आयात और आवागमन की निगरानी कर रहा है।
किसानों को राहत देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों की आपूर्ति पुरानी कीमतों पर ही जारी रहेगी। सब्सिडी दरों के संबंध में उचित निर्णय आगामी खरीफ सीजन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा की वर्तमान स्थिति
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पुष्टि की है कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है ताकि घरेलू मांग को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद, पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।
घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल पर 21.5 रुपये और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है। इससे घरेलू आपूर्ति में सुधार होगा।
सरकार ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है और घबराहट में खरीदारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
LPG और PNG आपूर्ति के लिए नए निर्देश
रसोई गैस की उपलब्धता को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने घरेलू पीएनजी और सीएनजी परिवहन के लिए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की है। औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का 80 प्रतिशत प्रदान किया जा रहा है।
वाणिज्यिक एलपीजी की कमी को दूर करने के लिए होटल और रेस्तरां जैसे संस्थानों को पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आईजीएल और गेल जैसी कंपनियां इसके लिए विशेष प्रोत्साहन दे रही हैं।
पीएनजीआरबी ने निर्देश दिया है कि आवासीय स्कूलों, हॉस्टलों और सामुदायिक रसोई को 5 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन दिए जाएं। इससे एलपीजी पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में 95 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई है। डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) के उपयोग से गैस की हेराफेरी और कालाबाजारी को रोकने में बड़ी सफलता मिली है।
कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जमाखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले 24 घंटों में देशभर में 2,500 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई है।
इन छापों के दौरान 2,000 से अधिक अवैध सिलेंडर जब्त किए गए हैं। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने नियमों का उल्लंघन करने वाले 500 से अधिक वितरकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
बिहार, झारखंड और केरल जैसे राज्यों में प्रवर्तन प्रयासों को और तेज करने की आवश्यकता बताई गई है। दिल्ली को छोड़कर सभी राज्यों ने स्थिति की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम स्थापित कर लिए हैं।
प्रवासी श्रमिकों की सुविधा के लिए पिछले दो दिनों में 88,000 से अधिक 5 किलोग्राम वाले एफटीएल सिलेंडर बेचे गए हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि समाज के हर वर्ग तक ऊर्जा की पहुंच बनी रहे।
समुद्री सुरक्षा और जहाजों का सुरक्षित आवागमन
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय पश्चिम एशिया में भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा पर लगातार नजर रख रहा है। वर्तमान में फारस की खाड़ी क्षेत्र में 18 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं।
इन जहाजों पर सवार सभी 485 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। महानिदेशक जहाजरानी (डीजी शिपिंग) का कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय है और अब तक 9,000 से अधिक ईमेल और 4,500 कॉल्स का निपटारा कर चुका है।
हाल ही में एलपीजी और एलएनजी लेकर आ रहे दो बड़े जहाजों, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। ये जहाज जल्द ही मुंबई और न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचेंगे।
देशभर के बंदरगाहों पर परिचालन पूरी तरह सामान्य है और कहीं भी भीड़भाड़ की स्थिति नहीं है। सरकार समुद्री हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय मिशनों के साथ निरंतर समन्वय बनाए हुए है।
राजनयिक प्रयास और प्रधानमंत्री की पहल
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात कर क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षित शिपिंग लाइनों के महत्व पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए वहां की सरकार के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। भारत ने क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है।
विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है। भारतीय दूतावास 24x7 हेल्पलाइन के जरिए नागरिकों को वीजा और रसद सहायता प्रदान कर रहे हैं।
28 फरवरी से अब तक लगभग 5,50,000 भारतीय यात्री विभिन्न उड़ानों के माध्यम से सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। हवाई क्षेत्र के प्रतिबंधों के बावजूद वैकल्पिक मार्गों से निकासी प्रक्रिया जारी है।
छात्रों और नाविकों का कल्याण
खाड़ी देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को लेकर सरकार गंभीर है। दूतावास स्थानीय अधिकारियों और शिक्षा बोर्डों के साथ समन्वय कर रहे हैं ताकि उनकी परीक्षाओं पर कोई असर न पड़े।
सीबीएसई और एनटीए जैसी एजेंसियां छात्रों और अभिभावकों के संपर्क में हैं। कुवैत और बहरीन जैसे देशों में जहां हवाई क्षेत्र बंद है, वहां से छात्रों को सऊदी अरब के रास्ते लाने की व्यवस्था की जा रही है।
भारतीय नाविकों के परिवारों के साथ निरंतर संचार बनाए रखा जा रहा है। अब तक 950 से अधिक नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई है। सरकार हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
दुखद रूप से, कुवैत में हुए एक हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है। सरकार पीड़ित परिवार के संपर्क में है और शव को शीघ्र वापस लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष और सार्वजनिक परामर्श
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की घबराहट में न आएं और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। ऊर्जा की बचत करना और वैकल्पिक ईंधनों को अपनाना वर्तमान समय की मांग है।
एलपीजी बुकिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें और अनावश्यक भीड़ से बचें। सरकार स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए हुए है और आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं दिया जाएगा।
पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर भारत की पैनी नजर है। उर्वरक से लेकर ईंधन तक, हर मोर्चे पर भारत की तैयारी पुख्ता है। किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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