कोलकाता | भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। शनिवार को आयोग ने तीसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया
यह सूची स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी की गई है। हालांकि, आयोग ने इसमें शामिल या हटाए गए मतदाताओं की संख्या को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की है।
अधिकारियों के अनुसार, सप्लीमेंट्री सूची में उन मतदाताओं को रखा जाता है जिन्हें अंतिम सूची के बाद जोड़ा जाता है। इसमें नए मतदाता और विवरण सुधार वाले नाम शामिल होते हैं।
क्यों हटाए गए 58 लाख नाम?
सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मृत्यु, स्थान परिवर्तन या डुप्लिकेशन जैसे कारणों से लाखों नाम हटाए गए हैं। अब तक करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए जा चुके हैं।
इस बड़ी कटौती के कारण राज्य में कुल मतदाताओं का आंकड़ा 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गया है। यह गिरावट चुनाव के समीकरणों को बदल सकती है।
न्यायिक जांच के घेरे में 60 लाख नाम
अभी भी लगभग 60 लाख से अधिक नाम ऐसे हैं जो न्यायिक जांच या 'अंडर एडजुडिकेशन' के दायरे में हैं। इन नामों पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
इससे पहले 23 मार्च को पहली और शुक्रवार को दूसरी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की गई थी। सूत्रों के अनुसार, इन सूचियों में क्रमशः 10 लाख और 21 लाख नाम शामिल थे।
चुनाव की महत्वपूर्ण तिथियां
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान की तारीखों का ऐलान पहले ही हो चुका है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे।
मतगणना 4 मई 2026 को होगी। चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में हो रहे इन व्यापक बदलावों ने राज्य की राजनीति में पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
विभिन्न राजनीतिक दल इस डेटा के सार्वजनिक न होने पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका मानना है कि मतदाताओं के सटीक आंकड़ों के बिना निष्पक्ष चुनाव की रणनीति बनाना कठिन है।
आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के तहत की जा रही है। आने वाले दिनों में और भी स्पष्टता आने की उम्मीद जताई जा रही है।