भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र को संबोधित करते हुए राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने युवा जनप्रतिनिधियों के लिए एक महत्वपूर्ण विजन प्रस्तुत किया।
युवा विधायकों का भोपाल महासम्मेलन: भोपाल में युवा विधायकों का सम्मेलन: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दिया 'विकसित भारत @2047' का मंत्र, राजस्थान के नवाचारों की चर्चा
भोपाल में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लोकतंत्र की मजबूती और विकसित भारत के निर्माण में युवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने तकनीक के उपयोग और सार्थक विधायी चर्चा पर जोर दिया।
HIGHLIGHTS
- भोपाल में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 45 वर्ष से कम आयु के विधायकों का दो दिवसीय महासंगम आयोजित हुआ।
- विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने 'विकसित भारत @2047' के संकल्प को पूरा करने के लिए युवा नेतृत्व को अनिवार्य बताया।
- राजस्थान विधानसभा में युवा विधायकों की बढ़ती संख्या और डिजिटल म्यूजियम जैसे नवाचारों की वैश्विक स्तर पर सराहना की गई।
- नेवा (NeVA) प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों से लोकतंत्र को पारदर्शी और सुलभ बनाने का आह्वान किया गया।
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लोकतंत्र की मजबूती में युवाओं की भूमिका
श्री देवनानी ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र की मजबूती और विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे आएं। यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण संवाद है। उन्होंने कहा कि युवा विधायकों को विधायिका का प्रमुख आधार बनना चाहिए। उन्हें पूरी प्रतिबद्धता और सक्रियता के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्रों की तरह ही विधायिका के कामकाज को भी पूरा महत्व देना चाहिए।
विकसित भारत @2047 का संकल्प
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 का संकल्प पूरा करने के लिए युवा जनप्रतिनिधियों का सक्रिय योगदान बहुत जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का संकल्प तब तक पूरा नहीं हो सकेगा, जब तक समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति का विकास नहीं होता। समावेशी विकास ही हमारे राष्ट्र की असली प्रगति का आधार है।
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विधायी ऊर्जा का 'त्रिवेणी संगम'
सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष से कम आयु के विधायकों ने भाग लिया। श्री देवनानी ने इस भागीदारी को “विधायी ऊर्जा का त्रिवेणी संगम” करार दिया। उन्होंने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि देश के एक बड़े वर्ग ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए नीति-निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी भविष्य की आवश्यकताओं को एक नई और सही दिशा दे सकती है।
राजस्थान विधानसभा में युवा नेतृत्व
श्री देवनानी ने बताया कि 16वीं राजस्थान विधानसभा में 45 वर्ष या उससे कम आयु के 30 से अधिक विधायक हैं। यह राज्य में युवा नेतृत्व के बढ़ते प्रभाव और जनता के विश्वास का एक बड़ा संकेत है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव युवाओं की नई सोच का प्रतीक है। लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की निरंतर सहभागिता से ही इसकी सार्थकता बनी रहती है।
डिजिटल लोकतंत्र और नेवा प्लेटफॉर्म
तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए श्री देवनानी ने ‘वन नेशन-वन एप्लिकेशन’ की चर्चा की। उन्होंने कहा कि नेवा (NeVA) प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल नवाचार लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी और सुलभ बना रहे हैं। युवा विधायकों की भूमिका डिजिटल डिवाइड को समाप्त करने में महत्वपूर्ण है। उन्हें तकनीक आधारित लोकतंत्र को बढ़ावा देना चाहिए ताकि नागरिकों और विधायिका के बीच संवाद को और अधिक मजबूत किया जा सके।
विधायकों के लिए विशेष सुझाव
श्री देवनानी ने युवा विधायकों को सदन में पूरी तैयारी के साथ बोलने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर अधिक से अधिक प्रश्न पूछे जाने चाहिए ताकि शासन की जिम्मेदारी तय हो सके। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे सीनियर लीडर्स के भाषणों को सुनें और उनके अनुभवों से सीखें। पुस्तकालयों में जाकर संदर्भ सामग्री का अध्ययन करना भी एक प्रभावी विधायक बनने के लिए आवश्यक है।
सार्थक विमर्श और विधायी समितियां
उन्होंने अपील की कि विधानसभाओं को शोर-शराबे की राजनीति से ऊपर उठकर समाधान आधारित संवाद का मंच बनाया जाए। सदन की कार्यवाही में प्रत्येक विधेयक पर तथ्य और शोध आधारित चर्चा होनी चाहिए। विधायी समितियों को ‘लघु विधायिका’ बताते हुए उन्होंने कहा कि इन समितियों में सक्रिय भागीदारी से ही शासन की जवाबदेही सुनिश्चित होती है। राजस्थान में विधानसभा सत्रों की संख्या बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
नवाचार और सांस्कृतिक संरक्षण
राजस्थान विधानसभा के नवाचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वहां डिजिटल म्यूजियम और राजनीतिक आख्यान संग्रहालय को जनदर्शन के लिए खोला गया है। अब तक 50 हजार से अधिक लोग इसे देख चुके हैं। अंत में उन्होंने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ परंपराओं को सहेजना आवश्यक है। विकास का मॉडल तभी टिकाऊ होगा जब वह स्थानीय संस्कृति और मूल्यों से गहराई से जुड़ा हो।
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