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जालोर में नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी: जालोर में सरकारी नौकरी के नाम पर 15 करोड़ की महाठगी: 200 लोगों को थमाए फर्जी नियुक्ति पत्र, आरोपी राकेश जीनगर फरार

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जालोर में नगर निकायों में नौकरी दिलाने के नाम पर एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें आरोपी राकेश जीनगर ने करीब 200 लोगों से 15 करोड़ रुपये ठग लिए। अब तक 30 पीड़ित सामने आ चुके हैं, जिन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ज्वाइनिंग तक करवा दी गई थी।

HIGHLIGHTS

  • आरोपी राकेश जीनगर ने 200 लोगों से करीब 12 से 15 करोड़ रुपये की ठगी की है।
  • पीड़ितों को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर नगर निकायों में ज्वॉइनिंग तक करवा दी गई थी।
  • अब तक 30 पीड़ित सामने आए हैं, जिन्होंने 3 से 10 लाख रुपये देने का दावा किया है।
  • नगर परिषद के रिकॉर्ड में इन नियुक्तियों का कोई उल्लेख नहीं है, आरोपी फिलहाल फरार है।
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जालोर | राजस्थान के जालोर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सरकारी नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। आरोपी राकेश जीनगर ने पिछले चार सालों में एक ऐसा मायाजाल बुना, जिसमें करीब 200 बेरोजगार युवा फंस गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने इन युवाओं से सरकारी नौकरी दिलाने के बदले 12 से 15 करोड़ रुपये वसूले हैं।

ठगी का बड़ा नेटवर्क और 30 पीड़ित

इस महाठगी के मामले में अब तक 30 पीड़ित पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंच चुके हैं। शनिवार को तीन और पीड़ितों ने जालोर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, जिसके बाद हड़कंप मच गया। आरोपी राकेश जीनगर ने हर पीड़ित से नौकरी के बदले 3 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की थी।

फर्जी नियुक्ति पत्र और ज्वॉइनिंग का खेल

ठगी का तरीका इतना शातिराना था कि आरोपी ने पीड़ितों को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए और उनकी ज्वॉइनिंग भी करा दी। पीड़ितों को विश्वास दिलाने के लिए उन्हें विभिन्न नगर निकायों में काम पर भी लगा दिया गया था। इन युवाओं को लग रहा था कि वे सरकारी कर्मचारी बन चुके हैं, लेकिन हकीकत में यह सब एक बड़ा फरेब था।

नगर परिषद के रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं

जालोर नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त दिलीप माथुर ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि परिषद के आवक-जावक रजिस्टर में इन नियुक्तियों का कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। माथुर के अनुसार, जो भी नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं, वे पूरी तरह से फर्जी हैं और कार्यालय से जारी नहीं हुए।

इन पदों पर दी गई फर्जी नियुक्तियां

ठगी के शिकार युवाओं को कनिष्ठ सहायक और अधिशाषी अधिकारी-2 जैसे महत्वपूर्ण पदों के फर्जी आदेश दिए गए थे। नवीन कुमार को आहोर, प्रवीण कुमार को सादड़ी और हरीश कुमार दवे को जालोर नगर परिषद में नियुक्त बताया गया था। इसी तरह कमलेश कुमार और पारसाराम को ब्यावर नगर परिषद में कनिष्ठ सहायक के पद पर फर्जी ज्वॉइनिंग दी गई थी।

बड़े शहरों के नाम पर भी हुआ खेल

आरोपी ने सिर्फ जालोर ही नहीं, बल्कि अलवर, भीलवाड़ा, उदयपुर और जयपुर ग्रेटर जैसे बड़े शहरों के नाम पर भी फर्जीवाड़ा किया। पवन कुमार, रितिक मीणा, आकाश मीणा और अरविंद कुमार को इन शहरों में अधिशाषी अधिकारी-2 के पद पर फर्जी नियुक्ति दी गई। ज्यादातर नियुक्ति आदेशों पर साल 2024 और 2025 की तारीखें दर्ज हैं, जो आरोपी के दुस्साहस को दिखाती हैं।

पीड़ितों की सूची और तारीखें

जालोर नगर परिषद में रविंद्र लाखावत, कुईयाराम, प्रशांत मीणा, ममता और खुशाल को जून 2025 की अग्रिम तारीखों पर नियुक्त दिखाया गया। वहीं लालाराम और विक्रम सिंह को जनवरी और अक्टूबर 2025 की तारीखों में कनिष्ठ सहायक बनाने का झांसा दिया गया। पुलिस अब इन सभी फर्जी दस्तावेजों को जब्त कर मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।

पुलिस की कार्रवाई और फरार आरोपी

कोतवाली पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है और सभी शिकायतों को मुख्य केस के साथ जोड़ दिया है। मुख्य आरोपी राकेश जीनगर फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या विभाग के कुछ कर्मचारियों ने आरोपी की इस काम में मदद की थी।

बेरोजगारों के लिए बड़ी चेतावनी

यह मामला उन सभी युवाओं के लिए एक सबक है जो बिना मेहनत और शॉर्टकट से सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को नौकरी के नाम पर पैसा न दें और केवल आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करें। अगर कोई और भी इस ठगी का शिकार हुआ है, तो वह बिना डरे पुलिस के पास आकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।

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