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नीरज डांगी का सरकार पर प्रहार: राज्यसभा में गूंजी नीरज डांगी की दहाड़: महंगाई, बेरोजगारी और गिरते रुपये पर मोदी सरकार को जमकर घेरा, पूछे तीखे सवाल

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत

राज्यसभा में सांसद नीरज डांगी ने विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार की आर्थिक नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और पीएम केयर्स फंड की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

HIGHLIGHTS

  • नीरज डांगी ने पीएम केयर्स फंड की पारदर्शिता और ऑडिट पर उठाए गंभीर सवाल।
  • 2014 से 2026 के बीच पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में भारी वृद्धि का दिया ब्यौरा।
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत को बताया देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा।
  • आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों के युवाओं की बेरोजगारी पर सरकार को घेरा।
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नई दिल्ली | राज्यसभा में 'विनियोग (2) विधेयक, 2026-27' पर चर्चा के दौरान माहौल काफी गरमाया हुआ नजर आया। राजस्थान से कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने सदन में अपनी बात रखते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों की धज्जियां उड़ा दीं। सांसद डांगी ने अपने भाषण की शुरुआत से ही सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि आखिर सरकार का यह भारी-भरकम बजट किसके हितों की रक्षा कर रहा है।

पीएम केयर्स फंड और बजट की पारदर्शिता

नीरज डांगी ने 53.47 लाख करोड़ रुपये के विशाल बजट पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने पूछा कि क्या यह पैसा वाकई देश की आम जनता के कल्याण के लिए है।

उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि बजट का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों की जेब भरने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। आम आदमी को इससे कोई राहत नहीं मिल रही।

सांसद ने पीएम केयर्स फंड का मुद्दा उठाते हुए इसे अपारदर्शी करार दिया। उन्होंने कहा कि देश की जनता जानना चाहती है कि इस फंड में जमा हुआ पैसा आखिर कहां खर्च किया गया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पीएम केयर्स फंड का कोई सार्वजनिक ऑडिट नहीं हुआ है। यह लोकतंत्र में पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है और जनता के साथ धोखा है।

गिरता रुपया और दम तोड़ती अर्थव्यवस्था

आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए डांगी ने रुपये की गिरती कीमत का मुद्दा उठाया। उन्होंने 2014 के आंकड़ों की तुलना आज की स्थिति से की।

डांगी ने बताया कि 2014 में जो डॉलर ₹60 के करीब था, वह अब ₹94 के पार जा चुका है। यह गिरावट भारत की आर्थिक साख पर एक बड़ा धब्बा है।

रुपये के कमजोर होने से देश में आयात होने वाली हर चीज महंगी हो गई है। कच्चा तेल, खाने का तेल और उर्वरक अब आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।

उन्होंने मेडिकल उपकरणों के महंगे होने पर भी चिंता जताई। इससे स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो गई हैं और गरीब आदमी इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

आईएमएफ की रेटिंग और डेटा की गुणवत्ता

सांसद ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने बताया कि भारत के राष्ट्रीय खातों को 'C ग्रेड' दिया गया है।

यह ग्रेडिंग बताती है कि देश के आर्थिक डेटा और निगरानी की गुणवत्ता कितनी खराब है। सरकार आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।

डांगी ने तंज कसते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं ही हमारे डेटा पर भरोसा नहीं कर रही हैं, तो देश की जनता को कैसे गुमराह किया जा सकता है।

किसानों की बदहाली और उर्वरक संकट

खेती-किसानी के मुद्दे पर सांसद डांगी ने सरकार की जमकर क्लास ली। उन्होंने कहा कि देश का अन्नदाता आज उर्वरक की कमी से जूझ रहा है।

खाद की कमी के कारण खेती की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। किसान लाइनों में खड़ा है और सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों में विकास के दावे कर रही है।

उन्होंने एलएनजी (LNG) आयात में आ रही बाधाओं की ओर भी ध्यान दिलाया। पश्चिम एशिया पर भारत की बढ़ती निर्भरता भविष्य के लिए एक बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है।

गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और महंगाई का बोझ

डांगी ने गैस सिलेंडर की किल्लत और उसकी कालाबाजारी का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में सिलेंडर ₹2000 तक में बिक रहे हैं।

उज्ज्वला योजना के दावों की पोल खोलते हुए उन्होंने कहा कि लोग अब वापस लकड़ी जलाने को मजबूर हैं। सिलेंडर भरवाना अब गरीब के बस की बात नहीं रही।

ग्रामीण इलाकों में डिलीवरी के लिए लागू किए गए ओटीपी सिस्टम पर भी उन्होंने सवाल उठाए। खराब नेटवर्क के कारण ग्रामीणों को सिलेंडर लेने में भारी परेशानी हो रही है।

महंगाई के चौंकाने वाले आंकड़े

सांसद ने 2014 और 2026 के बीच की कीमतों का तुलनात्मक विवरण पेश किया। पेट्रोल जो ₹70 था, वह अब ₹95 से ₹115 के बीच बिक रहा है।

डीजल की कीमतें ₹54-57 से बढ़कर ₹87-95 तक पहुंच गई हैं। परिवहन महंगा होने से हर जरूरी वस्तु के दाम आसमान छू रहे हैं।

एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹414 से बढ़कर ₹910-₹942 तक पहुंच गई है। उन्होंने पूछा कि क्या यही सरकार का 'अच्छे दिन' का वादा था?

मनरेगा और सामाजिक न्याय पर हमला

सांसद ने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को सरकार जानबूझकर खत्म कर रही है। आवंटित राशि 125 दिनों के रोजगार के लिए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।

एससी/एसटी वर्ग के लिए आवंटित बजट पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप का फंड पूरा इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।

सामाजिक न्याय के सरकारी दावों को उन्होंने खोखला बताया। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून को लागू करने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।

बेरोजगारी का तांडव और युवाओं का भविष्य

सांसद ने बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संस्थानों जैसे आईआईटी और आईआईएम के छात्र भी सड़कों पर हैं।

डिग्री धारक युवाओं के पास नौकरी नहीं है। सरकार के पास रोजगार सृजन का कोई ठोस रोडमैप नहीं है, जिससे युवाओं में भारी हताशा और निराशा व्याप्त है।

उन्होंने पूछा कि यदि देश का भविष्य यानी युवा ही बेरोजगार रहेगा, तो देश विकसित कैसे बनेगा। सरकार को केवल भाषणों के बजाय धरातल पर काम करना चाहिए।

निष्कर्ष: बजट को बताया जन-विरोधी

अपने संबोधन के अंत में सांसद नीरज डांगी ने इस बजट को 'जन-विरोधी' और 'संघ-विरोधी' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट आम जनता की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला है।

उन्होंने मांग की कि सभी सरकारी योजनाओं की नियमित और पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए। जनता के टैक्स के एक-एक पैसे का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।

डांगी के इस प्रखर भाषण ने राज्यसभा में सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया। अब देखना यह है कि सरकार इन गंभीर सवालों का क्या जवाब देती है।

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