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स्मैक किंग गिरफ्तार,: ऑपरेशन जिस्मन्ना: मारवाड़ का 25 हजार का इनामी स्मैक किंग गिरफ्तार

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एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बाड़मेर (Barmer) में ऑपरेशन 'जिस्मन्ना' (Operation 'Jismanna') के तहत 25 हजार के इनामी स्मैक किंग जितेंद्र मेघवाल को पकड़ा। पत्नी की बेंगलुरु भेजने की योजना ही उसके पकड़े जाने का कारण बनी।

HIGHLIGHTS

  • एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने ऑपरेशन 'जिस्मन्ना' के तहत मारवाड़ के स्मैक किंग को गिरफ्तार किया। जितेंद्र मेघवाल पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह कई मामलों में वांछित था। पत्नी ने उसे पुलिस और महिला मित्रों से बचाने के लिए बेंगलुरु भेजने की योजना बनाई थी। पुलिस ने पत्नी की योजना को सुराग बनाकर निजी बस से जितेंद्र को धर दबोचा।
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बाड़मेर: एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बाड़मेर (Barmer) में ऑपरेशन 'जिस्मन्ना' (Operation 'Jismanna') के तहत 25 हजार के इनामी स्मैक किंग जितेंद्र मेघवाल को पकड़ा। पत्नी की बेंगलुरु भेजने की योजना ही उसके पकड़े जाने का कारण बनी।

महानिरीक्षक एटीएस विकास कुमार ने बताया कि बाड़मेर के धोरीमन्ना थानान्तर्गत खरड़ गांव निवासी जितेंद्र मेघवाल को गिरफ्तार किया गया है। वह कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित था और पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी। धोरीमन्ना थाने में दर्ज एफआईआर के मामले में पकड़े न जाने पर उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उसके खिलाफ कुल आठ एफआईआर दर्ज हैं, जो उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को दर्शाती हैं।

पत्नी की तरकीब बनी गिरफ्तारी की वजह

इनाम घोषित होने के बाद जितेंद्र मेघवाल भूमिगत हो गया था और पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश कर रहा था। घर से दूर रहने के कारण वह कई महिला मित्रों के संपर्क में आ गया और उनके साथ अधिक समय बिताने लगा। जब उसकी पत्नी को इस बात का पता चला, तो उसने एक तरकीब सोची। पत्नी ने जितेंद्र को पुलिस से बचने के बहाने बेंगलुरु शिफ्ट होने का सुझाव दिया। उसका मुख्य मकसद था कि इस तरह जितेंद्र पुलिस के साथ-साथ अपनी महिला मित्रों से भी दूर हो जाएगा और एक नई जिंदगी शुरू कर पाएगा।

ऐसे बिछाया पुलिस ने जाल

जितेंद्र की पत्नी ने अपनी एक सहेली को इस योजना के बारे में अनजाने में बता दिया। यह बात किसी तरह एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) तक पहुंच गई, जिसने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने बाड़मेर से बेंगलुरु जाने वाली बसों, ट्रेनों और अन्य परिवहन साधनों से बुक होने वाले सभी टिकटों पर बारीकी से नजर रखनी शुरू कर दी। इसी दौरान, एक ट्रेवल्स एजेंसी से 13 नवंबर को जितेंद्र नाम से एक टिकट बुक कराया गया। जिस व्यक्ति ने यह टिकट बुक कराया था, वह जितेंद्र की पत्नी के संपर्क में भी था, जिससे पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली।

इन पुख्ता सुरागों के आधार पर एएनटीएफ की टीम ने रामजी का गोल के पास एक निजी स्लीपर बस को रुकवाया। बस में गहरी नींद में सो रहे जितेंद्र मेघवाल को पुलिस ने मौके पर ही धर दबोचा। यह ऑपरेशन 'जिस्मन्ना' एएनटीएफ के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ, जिसने एक कुख्यात अपराधी को कानून के शिकंजे में ला दिया।

मारवाड़ का स्मैक किंग: हर माह 20 किलो सप्लाई

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि जितेंद्र आठवीं पास होने के बाद उसके परिजनों ने उसे बेहतर भविष्य के लिए बेंगलुरु भेज दिया था। हालांकि, अमीर बनने की जल्दबाजी और गलत संगत की चाहत में वह वापस अपने गांव लौट आया। यहीं वह प्रकाश नामक व्यक्ति के संपर्क में आया, जिसने उसे स्मैक तस्करी के धंधे में शामिल कर लिया और अपना साझेदार बना लिया।

बहुत कम समय में ही जितेंद्र स्मैक का एक बड़ा और प्रभावशाली सप्लायर बन गया। पुलिस का कहना है कि वह हर महीने लगभग 20 किलोग्राम स्मैक लाकर उसकी सप्लाई करता था, जिससे उसने अवैध रूप से भारी संपत्ति अर्जित की। इसी वजह से वह पूरे मारवाड़ क्षेत्र में 'स्मैक किंग' के नाम से कुख्यात हो गया था। उसकी गिरफ्तारी से इस क्षेत्र में नशे के कारोबार को बड़ा झटका लगा है और कई अन्य तस्करों के नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।

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