करीब दो माह से एसीबी की अलग-अलग टीमें RSRDC के अधिकारियों व इनसे जुड़े लोगों की निगरानी कर रही थी। दो माह में आरोपी कई बार घूस की रकम देने जयपुर आए, लेकिन मंगलवार को एसीबी (ACB) की टीम ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के समय प्रबंध निदेशक सुधीर माथुर दफ्तर में नहीं थे।
एसीबी (ACB) टीमें सुधीर माथुर सहित अन्य आरोपियों के जयपुर, भरतपुर, धौलपुर व सीकर में आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर सर्च कर रही है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर धौलपुर व भरतपुर से जयपुर घूस की रकम देने आए थे और एसीबी (ACB) की टीम दोनों का धौलपुर व भरतपुर से पीछा कर रही थी।
चालक को बुलाकर रकम कार में रखवाई, एक नहीं, सभी कमरों में बैठता
दोनों प्रोजेक्ट डायरेक्टर RSRDC मुख्यालय पहुंचे और यहां पर आरोपी महेश चंद गुप्ता को घूस के 1.20 लाख रुपए दिए। तभी गुप्ता ने अपने निजी चालक को बुलाकर रकम दी और उसे कार में रखने के लिए भेज दिया। चालक रकम को कार में रख रहा था, तभी एसीबी की टीम ने आरोपियों को पकड़ लिया। इस संबंध में चालक से भी पूछताछ की जा रही है।
आरोपियों के पास से मौके पर 1.11 लाख रुपए और बरामद किए। RSRDC के कर्मचारियों ने बताया कि संविदा पर लगे महेश चंद गुप्ता का यहां ठिकाना एक कमरा नहीं था। वह जब चाहे किसी भी कमरे में जाकर बैठ जाता था।
तीन को हिरासत में ले रखा
एसीबी (ACB) ने सीकर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बाबूलाल सहित दो अन्य कार्मिकों को हिरासत में लिया है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। इनकी भूमिका मिलने पर गिरफ्तारी हो सकती है। तिजौरी, लॉकर व नोट गिनने की मशीन मिली |
आरोपी महेश चंद गुप्ता के जगतपुरा आवास पर एसीबी (ACB) की टीम ने सर्च किया। एसीबी को यहां पर तिजौरी व लॉकर नोटों की गड्डियों से भरे मिले। नोट गिनने की मशीन भी मिली। गुप्ता के घर पर रात तक 92 लाख रुपए की गिनती की जा चुकी थी।
वहीं सियाराम चन्द्रावत के आवास पर 32 लाख रुपए से अधिक बरामद किए गए। लिफाफा, बैग व अन्य कई जगह रुपए रखे मिले।
लाखों रुपए कीमत के मिले जेवर
एसीबी (ACB) ने आरोपी महेश चंद गुप्ता के आवास पर लाखों रुपए की कीमत के जेवर मिले। एसीबी को सोने-चांदी के जेवरों को तराजु से तोलना पड़ा।
टोल नाकों के नाम पर चल रहा बड़ा घोटाला
सीकर निवासी ताराचंद सैनी आरएसआरडीसी में ठेकेदारी करता था। उसने एसीबी (ACB) टीम को भी बताया कि राजस्थान के कई जगह संचालित टोल नाके लाखों रुपए टेंडर में छूटने चाहिए, लेकिन RSRDC अधिकारी मिलीभगत के चलते हजारों रुपए में ही टेंडर दे रखे हैं। टोल नाकों के नाम पर बड़ा घोटाला चल रहा है।