एआई आधारित 'सभासार' पहल और राष्ट्रीय परिदृश्य
दिसंबर महीने तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर की कुल 92,376 ग्राम पंचायतों ने स्वचालित बैठक सारांश के लिए 'सभासार' का सफलतापूर्वक उपयोग किया है। यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस तकनीक को तेजी से स्वीकार किया जा रहा है।
अन्य राज्यों की बात करें तो, उत्तर प्रदेश इस दिशा में काफी आगे है। वहां की 57 हजार पंचायतों में से 27 हजार से ज्यादा पंचायतों ने इस प्रणाली को लागू कर दिया है।
तमिलनाडु में भी एआई तकनीक का व्यापक उपयोग देखा जा रहा है। राज्य की 12 हजार से ज्यादा पंचायतों में से 11,874 पंचायतों ने इस एआई टूल को अपनाया है।
बिहार (5988 पंचायतें), छत्तीसगढ़ (8707 पंचायतें) और ओडिशा (6239 पंचायतें) जैसे राज्य भी इस तकनीक को अपनाने में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह उनकी ग्रामीण प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ कर रहा है।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल (60 पंचायतें) और मध्य प्रदेश (313 पंचायतें) जैसे बड़े राज्यों में अभी इसकी रफ्तार धीमी है। इन राज्यों को अपनी पंचायतों में जागरूकता और प्रशिक्षण बढ़ाने की आवश्यकता है।
राजस्थान में एआई अपनाने वाले अग्रणी जिले
राजस्थान की कुल 11,206 पंचायतों में से अब तक 1500 पंचायतों ने इस एआई तकनीक का उपयोग कर बैठक की कार्यवाही दर्ज की है। यह संख्या कुल पंचायतों का लगभग 13.4% है।
इनमें उदयपुर जिला सबसे आगे रहा है, जहां 650 में से 640 पंचायतों ने इस पहल को सफलतापूर्वक लागू किया है। यह लगभग 98% की सफलता दर दर्शाता है।
इसी तरह, बांसवाड़ा जिले में भी उत्साहजनक परिणाम देखने को मिले हैं। यहां की 417 पंचायतों में से 267 पंचायतों ने इस तकनीक का लाभ उठाया है।
बीकानेर जिला भी एआई के उपयोग में अग्रणी है। जिले की 364 पंचायतों में से 218 पंचायतें अब एआई आधारित रिकॉर्डिंग का उपयोग कर रही हैं।
अन्य जिलों में हनुमानगढ़ (184), राजसमंद (184), झालावाड़ (121), जैसलमेर (110), अलवर (84), धौलपुर (54) और डूंगरपुर (61) की पंचायतों ने भी इस तकनीक को अपनाया है। यह इन क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ने का संकेत है।
अजमेर (30), सिरोही (27), चित्तौड़गढ़ (26), बाड़मेर (16), प्रतापगढ़ (16), झुंझुनूं (14) और नागौर (65) की पंचायतों ने भी इस नवाचार को अपनाया है। हालांकि, इन जिलों में अभी और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
कम और शून्य भागीदारी वाले जिले
प्रदेश के 9 जिलों में एआई तकनीक अपनाने वाली पंचायतों का आंकड़ा दस-दस भी नहीं है। इनमें दौसा (4), भरतपुर (6), जोधपुर (5), भीलवाड़ा (2), बूंदी (1), करौली (1), पाली (1), सवाई माधोपुर (1) और सीकर (1) पंचायतें शामिल हैं।
यह स्थिति बताती है कि इन जिलों में तकनीक को अपनाने में अभी भी बड़ी बाधाएं मौजूद हैं। जागरूकता की कमी, तकनीकी सहायता का अभाव या बुनियादी ढांचे की समस्याएँ इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति उन जिलों की है जहां अभी तक एक भी पंचायत ने इस पोर्टल पर डेटा दर्ज नहीं किया है। इनमें जयपुर, बारां, चूरू, श्रीगंगानगर, जालोर, कोटा और टोंक जैसे जिले शामिल हैं।
इन जिलों में 200 से लेकर 600 तक ग्राम पंचायतें हैं, फिर भी शून्य भागीदारी गंभीर विषय है। पंचायतीराज मंत्रालय को इन जिलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
पंचायतीराज मंत्रालय की यह पहल ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजस्थान को इस डिजिटल क्रांति का पूरा लाभ उठाने के लिए अपनी गति बढ़ाने की आवश्यकता है।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ग्राम पंचायतों में 'सभासार' के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि जवाबदेही भी बढ़ेगी।