दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट और अशोक गहलोत पर प्रमोद जैन भाया को जीत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
अंता सीट को जीतने के लिए कांग्रेस जी-तोड़ मेहनत कर रही है।
वहीं, भाजपा के लिए भी यह सीट नाक का सवाल बनी हुई है।
बीजेपी का दांव: वसुंधरा राजे के करीबी मोरपाल सुमन
बीजेपी ने अंता उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी मोरपाल सुमन को टिकट दिया है।
इस फैसले के बाद अब वसुंधरा राजे की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से सीधे तौर पर जुड़ गई है।
टिकट वितरण को लेकर बीजेपी में काफी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला था।
आखिरकार, वसुंधरा राजे की चली और उनके पसंदीदा उम्मीदवार को मौका मिला।
कांग्रेस के स्टार प्रचारक: गहलोत-पायलट की जोड़ी पर नजरें
कांग्रेस ने प्रमोद जैन भाया को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
उनके सामने निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा भी चुनावी मैदान में हैं, जिन्हें मीणा वोटर्स का अच्छा समर्थन मिल रहा है।
इधर, कांग्रेस ने भी अपनी चुनावी रणनीति के तहत स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है।
इस सूची में अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या गहलोत और पायलट की जोड़ी प्रमोद जैन भाया को जीत दिलाने में सफल होगी?
यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी संयुक्त कोशिशें कितनी कारगर साबित होती हैं।
40 स्टार प्रचारकों की लंबी सूची
अंता विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
पार्टी ने कुल 40 स्टार प्रचारकों की एक लंबी सूची जारी की है।
इस सूची में अशोक गहलोत, सचिन पायलट, गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, डॉ सीपी जोशी, अशोक चांदना, जितेंद्र सिंह, हरीश चौधरी, मोहन प्रकाश, धीरज गुर्जर, दिव्या मदेरणा, शांति धारीवाल, रामलाल जाट, अर्जुन सिंह बामनिया, हरिमोहन शर्मा, मुरारी लाल मीणा, भजनलाल जाटव, उम्मेदाराम बेनीवाल और रामकेश मीणा जैसे कई प्रमुख नेता शामिल हैं।
त्रिकोणीय मुकाबला और चार जातियों की अहम भूमिका
अंता विधानसभा चुनाव में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने से स्थिति काफी रोचक बन गई है।
बीजेपी ने माली समाज के बाहुल्य को देखते हुए मोरपाल सुमन को टिकट दिया है।
वहीं, कांग्रेस ने प्रमोद जैन भाया पर अपना दांव खेला है।
निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा भी अपनी जाति के लगभग 32,000 वोटों के दम पर चुनावी मैदान में डटे हुए हैं।
इस चुनाव में विधानसभा की चार प्रमुख जातियां अपनी अहम भूमिका निभाएंगी।
इनमें माली समाज के लगभग 45,000 मतदाता हैं।
इसी तरह, अनुसूचित जाति वर्ग के लगभग 35,000 मतदाता हैं।
मीणा समाज के लगभग 32,000 के आसपास वोट बताए जा रहे हैं।
चौथी प्रमुख जाति मुस्लिम वर्ग है, जिनके करीब 25,000 वोट हैं।
ऐसे में, ये चारों जातियां ही चुनाव के गणित को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगी।
अंता उपचुनाव का परिणाम राजस्थान की राजनीति में कई नए समीकरण तय कर सकता है।