सचिन पायलट के अनशन से उपजी सियासी सरगर्मियों के बीच आयोजित अपनी प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि ज्यादा छापे डालने का मतलब करप्शन ज्यादा होना नहीं।
पायलट द्वारा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अनशन के अगले ही दिन गहलोत की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर संभावना जताई जा रही थी कि गहलोत अपनी सरकार पर उठे सवालों का जवाब देते हुए पायलट प्रकरण पर कुछ कहेंगे ,लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
यह सम्भावना इसलिए भी जताई गयी क्योंकि पायलट के मुद्दे पर गहलोत के पक्ष में एआईसीसी की और से राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश और कम्युनिकेशन सेल के प्रभारी पवन खेड़ा ने बयान जारी किये थे।
जयराम रमेश ने गहलोत सरकार और गहलोत की तारीफ की वहीं पार्टी के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सचिन पायलट के अनशन को अनशन से पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधि घोषित कर दिया था।
इस मुद्दे पर बहस तब ज्यादा बढ़ गयी जब पायलट खेमे के नेता मुखर हुए और कांग्रेस हाईकमान को धत्ता बताने की गरज से 25 सितंबर को अलग से विधायक दल की बैठक का मुद्दा उठा अब तक एक्शन नहीं होने पर सवाल खड़े किये।
कई मौकों पर सचिन पायलट को नाकारा ,निकम्मा और बागी बताने वाले अशोक गहलोत की चुप्पी को लेकर अब कई तरह की अटकलें हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि गहलोत खेमे की लाख कोशिश के बावजूद कांग्रेस हाईकमान पायलट को खोने के पक्ष में नहीं। लिहाजा विवाद बढ़ाने की बजाय गहलोत सचिन पायलट द्वारा उठाये सवालों को टालने में ही भलाई समझ रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस ने गहलोत ने इन मुद्दों को बताया प्रायोरिटी
बुधवार को तीसरे प्रहर आयोजित अपनी प्रेस कांफ्रेंस के जरिये गहलोत ने शिक्षा -स्वास्थ्य को अपनी पहले प्रायोरिटी बताया और कर्मचारी कल्याण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता रेखांकित की। सीएम गहलोत ने कहा कि स्वास्थ्य के मामले में हम देश के दुसरे राज्यों से बहुत पीछे हैं।
कोरोना काल में हमने जो शुरुआत की ,उसका फायदा लोगों को देना चाहते हैं। 2030 तक राजस्थान को नंबर वन बनाने को अपना लक्ष्य बताते हुए गहलोत ने कहा कि 35 सेवा करने वाले कर्मचारियों को शेयर मार्किट के भरोसे छोड़ा जाना ठीक नहीं।
गहलोत ने कहा कि ओल्ड पेंशन स्कीम के जरिये लोगों को यह विश्वास दिलाना पड़ेगा कि हम कर्मचारियों के साथ खड़े हैं। गहलोत ने महंगाई से राहत को अपना लक्ष्य बताते हुए 2700 महंगाई कैम्प लगाने की जानकारी भी दी।