जालोर । राजस्थान के अलवर में एक निजी नर्सिंग होम के आईसीयू में भर्ती महिला से दुष्कर्म और भीनमाल में चिकित्सक द्वारा मरीज से दुष्कर्म के मामलों ने चिकित्सा जैसे पाक—साफ पेशे पर ही सवाल खड़े किए हैं। भीनमाल में तो हद तब हो गई, जब स्थानीय पुलिस ने ही आरोपी को थाने लाकर भी छोड़ दिया। इससे यह साफ है कि प्रदेश में मौजूदा सरकार के महिला अपराधों में कमी लाने के संकल्प का कोई असर जालोर जिला पुलिस पर तो कम से कम नहीं है।
भीनमाल में महिला ने आरोप लगाया कि चिकित्सक सुरेश सुन्देशा ने उसे बेहोशी का इंजेक्शन देकर दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो बना लिए। आरोपी चिकित्सक ने उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश भी की। महिला ने सुसाइड नोट लिखकर जब आत्महत्या की कोशिश की तो पति को इसकी खबर हुई। बाद में इस संबंध में भीनमाल थाने में प्रकरण भी दिया गया, लेकिन अभी तक इस संबंध में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने ने कई सवाल उठाए है। हद तो तब हुई जब आरोपी को थाने लाने के बावजूद पुलिस ने न जाने किस दबाव में छोड़ दिया।

पति को बताने की धमकी देकर करता ब्लैकमेल
महिला का आरोप है कि पति के घर नहीं होने का पता कर वह घर आ जाता था। इलाज के बहाने नंबर भी ले लिए थे। जब जल्दी आ जाती थी तो पूरे दिन उसे बैठाकर रखता था। सभी मरीज निकल जाने के बाद उसे अंदर बुलाता था। उसे वीडियो कॉल करने के लिए दबाव बनाता था। कॉल काटने पर पति को बता देने की धमकी देता था। पुलिस ने पूछताछ की तो डॉक्टर भड़क गया, उसे शांति भंग में गिरफ्तार किया गया।
