राजनीति

जोधपुर में संघ की बड़ी बैठक: मोहन भागवत का 9 दिन का प्रवास औ

प्रदीप बीदावत · 01 सितम्बर 2025, 04:00 दोपहर
भारत की राजनीति में कई बार चुपचाप होने वाली घटनाएं ही सबसे बड़े संकेत छोड़ जाती हैं। और जब बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की हो, तो ये संकेत आने वाले वक्त की

जोधपुर।
भारत की राजनीति में कई बार चुपचाप होने वाली घटनाएं ही सबसे बड़े संकेत छोड़ जाती हैं। और जब बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की हो, तो ये संकेत आने वाले वक्त की दिशा तय करते हैं।
मरुस्थल की धरती जोधपुर में सरसंघचालक मोहन भागवत का नौ दिन का प्रवास, और संघ परिवार के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी… क्या यह सिर्फ संगठनात्मक बैठक है या इसके पीछे छिपे हैं 2024 के बाद की भारतीय राजनीति के बड़े इशारे?

9 दिन का प्रवास, जोधपुर बना केंद्र

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जोधपुर पहुंच गए हैं। उनका प्रवास 9 सितंबर तक चलेगा।
इन नौ दिनों तक जोधपुर न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश की राजनीति और संघ परिवार का केंद्र रहेगा।

अखिल भारतीय समन्वय बैठक

शामिल संगठन:

प्रमुख चेहरे

बैठक में मौजूद रहेंगे:

यानि भाजपा और संघ का पूरा शीर्ष नेतृत्व एक ही मंच पर नज़र आएगा।

बैठक का एजेंडा

इस बैठक में चर्चा होगी—

संघ शताब्दी वर्ष और पंच परिवर्तन

संघ का शताब्दी वर्ष 2025-26 में आने वाला है। इसके लिए संघ ने पंच परिवर्तन का संकल्प लिया है:

  1. राष्ट्र निर्माण

  2. सेवा गतिविधियाँ

  3. सामाजिक एकता

  4. कुटुंब प्रबोधन

  5. स्वावलंबन और समाज सुधार

जोधपुर प्रवास के दौरान इन लक्ष्यों पर रणनीति तय की जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था

जोधपुर पुलिस ने बैठक स्थल को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील घोषित किया है।
???? ड्रोन उड़ाने पर रोक लगा दी गई है।
???? आदर्श विद्या मंदिर और आसपास के इलाकों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

राजनीतिक महत्व और निहितार्थ

मोदी और संघ का बढ़ता सामंजस्य

प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को खुले मंच से आरएसएस की सराहना की थी। यह भाजपा-संघ के रिश्तों में और गहराई का संकेत है।

संघ की बढ़ती भूमिका

हाल ही में संघ से जुड़े नेता सी.पी. राधाकृष्णन का उप-राष्ट्रपति बनना भी संघ के राजनीतिक प्रभाव की झलक है।

राजस्थान की राजनीति पर असर

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले यह प्रवास भाजपा की रणनीति में संघ की बड़ी भूमिका का संकेत देता है।
जोधपुर और मारवाड़ की राजनीति हमेशा निर्णायक रही है।

राष्ट्रीय संदेश

अवैध प्रवास और जनसांख्यिकी का मुद्दा आने वाले लोकसभा चुनावों में भाजपा का मुख्य एजेंडा बन सकता है।
स्वावलंबन और आर्थिक आत्मनिर्भरता—मोदी सरकार की विकास नीति के साथ जोड़ी जाएगी।

जोधपुर में होने वाली यह तीन दिवसीय बैठक सिर्फ वार्षिक परंपरा नहीं, बल्कि संघ शताब्दी वर्ष की तैयारियों का आगाज़ है।
मोहन भागवत का नौ दिन का प्रवास, नड्डा-संतोष की मौजूदगी और 32 संगठनों का संगम… ये सब मिलकर यही संदेश दे रहे हैं कि—

???? भारत की राजनीति का आने वाला नक्शा मरुस्थल की इस धरती से तय होगा।

✍️ आपकी राय
क्या संघ की यह बैठक केवल संगठनात्मक है, या इसके पीछे छिपे हैं 2024 के बाद की भारतीय राजनीति के बड़े संकेत?

← पूरा आर्टिकल पढ़ें (Full Version)