यह पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गया है।
जूनागढ़ किले में दर्शन को लेकर टकराव
शुक्रवार को पूर्व राजपरिवार की सदस्य राज्यश्री कुमारी जूनागढ़ किले में स्थित एक निजी मंदिर में दर्शन करने जा रही थीं।
हालांकि, उन्हें मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया गया।
यह मंदिर पूर्व राजपरिवार की निजी संपत्ति के अधीन आता है।
परंपरागत रूप से केवल राजपरिवार के सदस्य ही इसमें दर्शन करते रहे हैं।
पुलिस और वकीलों की मौजूदगी में बहस
पुलिस ने राज्यश्री कुमारी को किले में प्रवेश करने से रोक दिया।
मौके पर भाजपा विधायक सिद्धि कुमारी के विधि सलाहकार अशोक व्यास आवश्यक दस्तावेज लेकर पहुंचे।
उधर, राज्यश्री कुमारी के वकील कमल नारायण पुरोहित भी अपने दस्तावेज लेकर मौके पर आए।
दोनों पक्षों के बीच करीब दो घंटे तक तीखी बहस चलती रही।
अंततः राज्यश्री कुमारी को बिना दर्शन किए ही वापस लौटना पड़ा।
दबाव में काम करने का आरोप
राज्यश्री कुमारी ने आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा विधायक सिद्धि कुमारी के दबाव में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हीं के दबाव में उन्हें मंदिर तक जाने से रोक रही है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया था।
न्यायालय में विचाराधीन है मामला
संपत्ति विवाद को लेकर विधायक सिद्धि कुमारी ने बीकानेर के जिला न्यायालय में वाद दायर किया है।
वाद में उन्होंने करणी सिंह की वसीयत के तहत उन्हें संपत्तियों का एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की मांग की है।
साथ ही बुआ से संपत्तियों के हिसाब-किताब और नियंत्रण का कब्जा दिलाने की भी मांग की गई है।
दूसरी ओर, राज्यश्री कुमारी ने भी कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र लगाया है।
उन्होंने सिद्धि कुमारी पर पूर्व राजपरिवार की संपत्तियों को अवैध रूप से खुर्द-बुर्द करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।
फिलहाल यह पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और सुनवाई जारी है।