दरअसल, उदयपुर में जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा ने धारा 144 लगा रखी है। इसके तहत उदयपुर शहर और ग्रामीण इलाके में धार्मिक ध्वज लगाने पर पाबंदी लगा दी गई है।
इन आदेशों के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक झंडे लगाने पर दो महीने की रोक रहेगी।
इस आदेश के बाद भाजपा में बेहद आक्रोश है और पार्टी इस मुद्दें को लेकर सीएम गहलोत पर हमलावर होती दिख रही है।
आखिर किसके दबाव में कर रहे ऐसा?
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जोशी ने इस मुद्दे को लेकर कहा है कि मुझे लगता है राजस्थान सरकार जानबूझकर मंदिरों और धार्मिक उत्सवों के पीछे पड़ी है। इसके पीछे मकसद क्या है, वो किसे खुश करना चाहते हैं और किसके दबाब में ऐसा कर रहे हैं, यह पता नहीं।
इसी के साथ सीपी जोशी ने ये भी कहा कि राजस्थान में प्रेम, भाईचारा, सदभाव का वातावरण रहा है।
सभी धर्म मजहब के लोग अपना-अपना त्योहार प्रेम और भाईचारे के साथ मनाते आए हैं, लेकिन इन साढे चार सालों में सबकुछ बदल गया है।
उदयपुर महाराणा प्रताप की धरती है। मेवाड की जिस पताका को लेकर उन्होंने मुगलों को परास्त किया, वहां भगवा पताका नहीं लगेगी तो क्या तालिबान में लगेगी?
भाजपा अध्यक्ष का आरोप है कि सीएम गहलोत राजस्थान में तालिबानी राज बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राम नवमी पर जुलूस नहीं निकलेगा, हनुमान जयंती पर डीजे नहीं बजेगा, नववर्ष पर जुलूस नहीं निकाल सकते, जयश्रीराम का नारा नहीं लगा सकते।
मेवाड़ की धरती पर यह सब होगना दुर्भाग्यपूर्ण है। राजस्थान सरकार इस तरह के निर्णय करती जो बेहद आश्चर्यजनक है।