पारीक का तर्क है कि यदि महोत्सव की तिथियां और कार्यक्रमों की रूपरेखा काफी पहले सार्वजनिक कर दी जाती है, तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन एजेंसियां और विदेशी पर्यटक अपने आगामी 'टूर कैलेंडर' में बूंदी को प्राथमिकता के साथ शामिल कर सकेंगे। अक्सर यह देखा गया है कि प्रचार-प्रसार की कमी और अंतिम समय में होने वाली घोषणाओं के कारण विदेशी पर्यटक बूंदी की अमूल्य धरोहरों और इस भव्य उत्सव का आनंद लेने से वंचित रह जाते हैं। समयबद्ध योजना से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश की संभावनाएं भी प्रबल होंगी।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
महोत्सव की समयबद्ध योजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोलेगी। जब पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, तो होटल उद्योग, हस्तशिल्प, गाइड और परिवहन सेवाओं से जुड़े स्थानीय लोगों की आय में प्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होगी। पारीक ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार जिला प्रशासन को तत्काल निर्देश दे कि वे स्थानीय जनता, पर्यटन विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित करें ताकि महोत्सव के स्वरूप को और अधिक आकर्षक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया जा सके।
कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग
मांग पत्र में बूंदी रेल मार्ग को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और महानगरों से सीधे जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। सुगम आवागमन ही किसी भी पर्यटन स्थल की सफलता की कुंजी होती है। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेलों में बूंदी के ऐतिहासिक वैभव का समयबद्ध और आक्रामक तरीके से प्रचार करने की योजना बनाने का भी आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि 'छोटी काशी' में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें एक कारगर और दूरदर्शी नीति के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है।
प्रतिनिधिमंडल की आगामी मुलाकात
पुरुषोत्तम पारीक ने बताया कि वे जल्द ही एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ शीर्ष नेताओं और अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे लिखित रूप में एक विस्तृत कार्ययोजना और स्थानीय जनभावनाओं को उनके सम्मुख प्रस्तुत करेंगे। उनका लक्ष्य है कि बूंदी महोत्सव केवल एक वार्षिक आयोजन बनकर न रह जाए, बल्कि यह क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक उन्नति का एक सशक्त आधार बने। उनका मानना है कि यदि सरकार और प्रशासन मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो निश्चित रूप से 'छोटी काशी' का वैभव पूरी दुनिया में चमकेगा और बूंदी को उसका खोया हुआ गौरव पुनः प्राप्त होगा।