चंद्रयान-3 के लैंडर से प्रोपल्शन मॉड्यूल के अलग होने के साथ ही अब लैंडर की आगे की यात्रा अकेले ही शुरू हो गई है।
अब लैंडर अपने अहम और आखिरी पड़ाव पर पहुंच रहा है। अब आगामी 6 दिन में चांद की धरती पर उतर जाएगा।
प्रोपल्शन मॉड्यूल भी देता रहेगा अहम जानकारियां
प्रोपल्शन मॉड्यूल भी लैंडर से अलग होने के बाद लगातार इसी धुरी पर घूमते हुए इसरो को पृथ्वी की कई अहम जानकारियां पहुंचाता रहेगा।
चांद की सतह पर उतरते ही लेंगे सेल्फी
अगस्त में जब ये लैंडर ’विक्रम’ चांद की सतह पर उतरेगा तो उससे एक रैंप निकलेगा।
जिससे लढ़कता हुआ रोवर ’प्रज्ञान’ बाहर आएगा। लैंडर और रोवर दोनों पर देश का तिरंगा चस्पा किया गया है।
इसके बाद लैंडर और रोवर दोनों भारतीय तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी और एक दूसरे की तस्वीरें चांद से धरती पर भेजेंगे।
बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन सितंबर 2019 में भेजे गए चंद्रयान-2 का अनुवर्ती मिशन है, जिसके चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और घूमने की संपूर्ण क्षमता प्रदर्शित करने की उम्मीद है।
पिछली बार चंद्रयान-2 मिशन के दौरान लैंडर के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ नहीं कर पाने के कारण सफलता नहीं मिल पाई थी।