चित्तौड़गढ़ | राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में हुए बहुचर्चित व्यापारी रमेश ईनाणी हत्याकांड में एक नया मोड़ आया है। संत भजनाराम महाराज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर उनका नाम उछाल रहे हैं।
उन्होंने संत रामदयाल पर निशाना साधते हुए कहा कि रामदयाल ने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम इस विवाद से जोड़ा है। भजनाराम ने स्पष्ट किया कि उनकी और संत रमताराम की वेशभूषा और रहन-सहन में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने बताया कि वह भगवा वस्त्र धारण करते हैं और साफा पहनते हैं जबकि रमताराम गुलाबी कपड़े पहनते हैं और सिर पर चद्दर ओढ़ते हैं। भजनाराम ने शूटर मनीष दुबे को जानने की बात से भी इनकार किया है। उनका कहना है कि पुलिस गलत तरीके से उन्हें इस मामले में घसीट रही है। उन्होंने अपने बचाव में एक खंडन पत्र भी जारी किया है जिसमें उन्होंने अपनी बेगुनाही के सबूत पेश किए हैं।
इस मामले की जांच के दौरान सिरोही और चित्तौड़गढ़ के दो संतों के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस की संदिग्ध सूची में नाम आने के बाद रामस्नेही संप्रदाय ने कड़ा कदम उठाते हुए संत रमताराम महाराज और संत भजनाराम महाराज को संप्रदाय से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब कोर्ट ने संत रमताराम की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। 11 नवंबर को चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध व्यापारी रमेश ईनाणी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के शूटर मनीष दुबे को गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि इस पूरी साजिश के पीछे जमीन का बड़ा विवाद मुख्य कारण था। मृतक के परिजनों ने अपनी रिपोर्ट में संत रमताराम के साथ चल रहे विवाद का स्पष्ट उल्लेख किया था। दूसरी ओर सिरोही रामद्वारा के संत भजनाराम महाराज ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा लगाई जा रही कड़ियां पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक हैं। संत भजनाराम ने यह भी कहा है कि यदि वह आरोपी है तो पुलिस उन पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा के खिलाफ कुछ लोग जहर उगल रहे हैं।