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चित्तौड़गढ़ रमेश ईनाणी हत्याकांड: रामस्नेही संप्रदाय सिरोही के भजनाराम का संत रामदयाल पर निशाना

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 66

चित्तौड़गढ़ के चर्चित व्यापारी रमेश ईनाणी हत्याकांड में पुलिस जांच के बाद रामस्नेही संप्रदाय ने संत रमताराम और भजनाराम को निष्कासित कर दिया है। सिरोही के भजनाराम महाराज ने आरोपों को निराधार बताया है। संत भजनाराम ने यह भी कहा है कि यदि वह आरोपी है तो पुलिस उन पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। उनकी सामाजिक और राजनीतिक प

HIGHLIGHTS

  1. 1 रामस्नेही संप्रदाय ने संत रमताराम और भजनाराम को संप्रदाय से बाहर किया। सिरोही के संत भजनाराम ने खुद पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह नकारा। संत भजनाराम ने यह भी कहा है कि यदि वह आरोपी है तो पुलिस उन पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा के खिलाफ कुछ लोग जहर उगल रहे हैं।
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सिरोही के भजनारामने संत रामदयाल पर निशाना साधते हुए कहा कि रामदयाल ने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम इस विवाद से जोड़ा है

चित्तौड़गढ़ | राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में हुए बहुचर्चित व्यापारी रमेश ईनाणी हत्याकांड में एक नया मोड़ आया है। संत भजनाराम महाराज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर उनका नाम उछाल रहे हैं।

उन्होंने संत रामदयाल पर निशाना साधते हुए कहा कि रामदयाल ने अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम इस विवाद से जोड़ा है। भजनाराम ने स्पष्ट किया कि उनकी और संत रमताराम की वेशभूषा और रहन-सहन में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने बताया कि वह भगवा वस्त्र धारण करते हैं और साफा पहनते हैं जबकि रमताराम गुलाबी कपड़े पहनते हैं और सिर पर चद्दर ओढ़ते हैं। भजनाराम ने शूटर मनीष दुबे को जानने की बात से भी इनकार किया है। उनका कहना है कि पुलिस गलत तरीके से उन्हें इस मामले में घसीट रही है। उन्होंने अपने बचाव में एक खंडन पत्र भी जारी किया है जिसमें उन्होंने अपनी बेगुनाही के सबूत पेश किए हैं।

इस मामले की जांच के दौरान सिरोही और चित्तौड़गढ़ के दो संतों के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस की संदिग्ध सूची में नाम आने के बाद रामस्नेही संप्रदाय ने कड़ा कदम उठाते हुए संत रमताराम महाराज और संत भजनाराम महाराज को संप्रदाय से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब कोर्ट ने संत रमताराम की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। 11 नवंबर को चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध व्यापारी रमेश ईनाणी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के शूटर मनीष दुबे को गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि इस पूरी साजिश के पीछे जमीन का बड़ा विवाद मुख्य कारण था। मृतक के परिजनों ने अपनी रिपोर्ट में संत रमताराम के साथ चल रहे विवाद का स्पष्ट उल्लेख किया था। दूसरी ओर सिरोही रामद्वारा के संत भजनाराम महाराज ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा लगाई जा रही कड़ियां पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक हैं। संत भजनाराम ने यह भी कहा है कि यदि वह आरोपी है तो पुलिस उन पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है। उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा के खिलाफ कुछ लोग जहर उगल रहे हैं।

संप्रदाय से निष्कासन और भविष्य की रणनीति

रामस्नेही संप्रदाय द्वारा किए गए निष्कासन पर संत भजनाराम ने कहा कि वह एक स्वतंत्र संत की तरह कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक विचारधारा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्वीकार किया कि वह पहले कांग्रेस विचारधारा के समर्थक थे लेकिन अब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा के साथ हैं। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रहित की सोच रखने वालों के साथ खड़े हैं और यदि भाजपा भी कभी राष्ट्र विरोधी कार्य करेगी तो वह उनसे भी अलग हो जाएंगे। इस हत्याकांड ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में बड़ी बहस छेड़ दी है। एक तरफ पुलिस अपनी पुख्ता जांच का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ संत समाज के कुछ लोग इसे षड्यंत्र बता रहे हैं। रमेश ईनाणी के परिवार को अभी भी न्याय का इंतजार है। पुलिस का कहना है कि जैसे ही मुख्य आरोपी संत रमताराम की गिरफ्तारी होगी इस हत्याकांड की पूरी परतें खुल जाएंगी। फिलहाल संप्रदाय से निष्कासन के बाद दोनों संतों की मुश्किलें और बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

जांच के आगामी चरण

चित्तौड़गढ़ पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों को और अधिक मजबूत करने में जुटी है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या शूटर को सुपारी देने में किसी अन्य माध्यम का उपयोग किया गया था। सिरोही में भजनाराम महाराज के आश्रम और उनके संपर्कों की भी निगरानी की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस मामले में अभी कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं जो इस बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती हैं। व्यापारी हत्याकांड के बाद चित्तौड़गढ़ के व्यापारिक संगठनों ने भी सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन किए थे। प्रशासन पर दबाव है कि वह जल्द से जल्द सभी दोषियों को सजा दिलाए। संतों के नाम सामने आने से इस मामले ने धार्मिक रंग भी ले लिया है जिससे पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस की जांच किस दिशा में जाती है और क्या भजनाराम महाराज अपनी बेगुनाही साबित कर पाते हैं।

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