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राजनीति

सीएम गहलोत ने नहीं मानी मांग, तो विधायक ने सौंप दिया इस्तीफा

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भिवाड़ी को जिला नहीं बनाए जाने से विधायक संदीप यादव सीएम से इतने खफा हुए कि उन्होंने राजस्थान सब रिजनल (एनसीआर) इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट बोर्ड (आरएसआरआईडीबी) के चेयरमैन पद से अपना इस्तीफा सीएम को सौंप दिया है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 भिवाड़ी को जिला नहीं बनाए जाने से विधायक संदीप यादव सीएम से इतने खफा हुए कि उन्होंने राजस्थान सब रिजनल (एनसीआर) इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट बोर्ड (आरएसआरआईडीबी) के चेयरमैन पद से अपना इस्तीफा सीएम को सौंप दिया है।
cm gehlot not accept district demand tijara  mla sandeep yadav resign from rsridb as chairman
Sandeep Yadav

जयपुर | राजस्थान सीएम अशोक गहलोत के 19 नए जिलों की घोषणा के बाद जहां उन क्षेत्रों के नेताओं और लोगों में खुशी की लहर छाई हुई हैं वहीं दूसरी ओर जिन नेताओं की मांग पूरी नहीं हुई वे सीएम के इस कदम से बेहद नाराज भी हैं।

इन्हीं में से एक हैं अलवर जिले के तिजारा विधायक संदीप यादव। 

भिवाड़ी को जिला नहीं बनाए जाने से विधायक संदीप यादव सीएम से इतने खफा हुए कि उन्होंने राजस्थान सब रिजनल (एनसीआर) इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट बोर्ड (आरएसआरआईडीबी) के चेयरमैन पद से अपना इस्तीफा सीएम को सौंप दिया है।

गौरतलब है कि, शुक्रवार शाम विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सीएम अशोक गहलोत ने राज्य में 19 नए जिलों की घोषणा करते हुए सभी को चौंका दिया था।

इस घोषणा के साथ ही राज्य में अब जिलों की संख्या 50 हो गई है। लेकिन उसमें तिजारा विधायक की मांग पूरी नहीं हो सकी और भिवाड़ी को जिले का दर्जा नहीं मिल सका। 

ऐसे में विधायक महोदय काफी निराश है। उनका कहना है कि तिजारा-भिवाड़ी की जनता ने तिजारा के हितों के लिए मुझे चुनकर भेजा था। तिजारा के विकास के लिए जो भी संभव हो सकता था वो सब मैंने किया। 

लेकिन भिवाड़ी को जिला बनाने की मांग की अनदेखी से तिजारा-भिवाड़ी के लोग बेहद निराश हैं। 

विधायक का ये भी कहना है कि भिवाड़ी राज्य का बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है और सरकार को बड़ा राजस्व देता है। 

सीएम गहलोत की इस अनदेखी से तिजारा-भिवाड़ी क्षेत्र की जनता काफी दुखी है और मैं जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मनोनीत चेयरमैन पद से इस्तीफा देता हूं।

आपको बता दें कि, तिजारा से विधायक संदीप यादव प्रदेश की राजनीति में सबसे कम उम्र के विधायक होने का भी तमगा पा चुके हैं। इसके अलावा विधायक महोदय ने तीन पार्टियां बदलने का भी काम किया है। इसके बावजूद हर पार्टी में उनको खास महत्व मिला है। 

भाजपा के जरिए राजनीति में आए और पिछली सरकार में बिना विधायक रहते हुए युवा बोर्ड उपाध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा पाया। जब विधानसभा चुनावों में भाजपा से टिकट नहीं मिला तो बसपा के हाथी पर बैठ गए और विधायक बने। इसके बाद बसपा को छोड़ कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया।

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