उन्होंने लिखा कि विधायक के रूप में आपको यह मेरा आखरी पत्र है। चार बार विधायक के रूप में कार्य करने का जनता ने मुझे अवसर प्रदान किया, उसके लिए मैं आप सभी का आभार प्रकट करता हूं।
गौरतलब है कि विधायक भरत सिंह ने अपनी ही कांग्रेस सरकार पर कई बार सवाल उठाए हैं।
वे कई बार अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर गंभीर आरोप भी लगा चुके हैं। बता दें कि इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भरत सिंह को टिकट नहीं दिया था।
ये भी लिखा पत्र में
विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने अपने पत्र में ये भी लिखा कि वर्ष 1971 में अपनी पढाई पूरी करके मैं अपने पैतृक गांव कुन्दनपुर आया था।
उस समय से लेकर वर्ष 2023 तक मैं क्षेत्र की जनता व उनकी समस्या से जुडा रहा हूं। मुझे संतोष है कि इस क्षेत्र का नागरिक होने के नाते आप सभी के सहयोग से सांगोद का विकास कर एक पहचान प्रदान कर सका हूं।
मैं उन सभी भाईयो का भी आभारी हूं जो मेरे आलोचक रहे है, क्योंकि उन्होंने सदा मेरी कमियों को उजागर किया है।
कुन्दनपुर गांव व पंचायत के लोगों के अथाह प्रेम का मैं ऋणी रहूंगा, क्योंकि वह दुख-सुख में सदा मेरे साथ रहे हैं।
भरत सिंह कुन्दनपुर को प्रदेश में पहचान प्रदान करने में आप सभी का बडा योगदान रहा है।

सीएम गहलोत को पत्र में लिखा था- मुख्यमंत्री का पद भी स्थाई नहीं है
आपको बता दें कि कई बार अपनी कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाने वाले सांगोद विधायक भरत सिंह ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सीएम अशोक गहलोत को भी एक पत्र लिखा था।
जिसमें उन्होंने आरोप लगाते हुए लिखा था कि भाया के भ्रष्टाचार को आपने खुला समर्थन दिया। खान की झोपड़ियां गांव को कोटा जिले में शामिल नहीं किया।
गांधीवादी अशोक गहलोत को यह शोभा नहीं देता। आपका ईमान मर चुका है। आपके ईमान के मरने पर में मुंडन करवा कर अपने केश आपको भेंट कर रहा हूं। कृपया यह तुच्छ भेंट स्वीकार करें।
महात्मा गांधी को याद कर उनके बताए गए ‘सात’ पाप पर चिंतन करें। मुख्यमंत्री का यह पद स्थाई नहीं है।