राजेंद्र ने अपने पिता रतनलाल को अपने अपहरण की खबर देकर 6 लाख रुपये की फिरौती की मांग की। उसने धमकी भरे मैसेज भेजे कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उसे मार दिया जाएगा। उसने अपने फोन को बंद कर दिया और सिरोही, हरजी, बालोतरा, पचपदरा, साण्डेराव, रानी और सादड़ी के आसपास घूमता रहा।
पुलिस की तत्परता और आरोपी की गिरफ्तारी
जालोर पुलिस ने 7 टीमों का गठन किया और 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। गुरुवार को पुलिस ने रणकपुर के रास्ते में राजेंद्र को उसकी मोटरसाइकिल के साथ पकड़ लिया। पुलिस ने राजेंद्र को सादड़ी कस्बे के पास से गिरफ्तार किया और उससे गहन पूछताछ की। पूछताछ में राजेंद्र ने स्वीकार किया कि उसने शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह योजना बनाई थी।
पुलिस की जांच में हुआ खुलासा
जांच के दौरान पुलिस को राजेंद्र के बारे में जानकारी मिली कि उसने अपने अपहरण की झूठी कहानी बनाई थी। पुलिस को राजेंद्र का पता लगाने में कठिनाई हुई क्योंकि उसके पास आईफोन था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था। पुलिस ने राजेंद्र को कई स्थानों पर देखा, जहां वह अकेला ही नजर आया। इससे पुलिस को शक हुआ और अंत में राजेंद्र की साजिश का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस अधिकारी का बयान
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामेश्वरलाल ने बताया कि राजेंद्र सोमवार को घर से ग्रेनाइट फैक्ट्री जाने के लिए निकला था, लेकिन उसने सिरोही, हरजी, बालोतरा, पचपदरा, साण्डेराव, रानी और सादड़ी के विभिन्न इलाकों में घूमता रहा। पुलिस ने तकनीकी सहायता और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से उसे ढूंढने की कोशिश की और अंत में गुरुवार शाम को रणकपुर के रास्ते से गिरफ्तार किया।
इस घटना ने साबित कर दिया कि पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच ने एक जटिल मामले को सुलझा लिया। राजेंद्र को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।