हालांकि, इस बारे में वीरांगना और उनके बेटों को इसकी खबर नहीं दी है। आज शहीद की पार्थिव देह उनके गांव आ रही है।
शहीद के परिवार में बुजुर्ग पिता लालाराम जाट, पत्नी कमलेश और दो बच्चे हैं। मां का एक साल पहले निधन हो चुका है। बेटा विशाल सीकर में ’नीट’ की तैयारी कर रहा है।
छोटा बेटा विशेष जयपुर के बगरू में 11वीं क्लास में साइंस का फाउंडेशन कोर्स कर रहा है।
आर्मी कैंप पर आतंकियों ने किया था हमला
जानकारी के मुताबिक, कुलगाम में आतंकियो ने सेना के कैंप पर हमला बोला था। इसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें 3 जवान घायल हो गए।
जिसमें बाबूलाल भी शामिल थे। तीनों को गंभीर हालत में श्रीनगर के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां इलाज के दौरान देर रात राजस्थान के सपूत बाबूलाल की मौत हो गई।
पिता की आंखों के ऑपरेशन के लिए छुट्टी लेकर आए थे
परिवार के लोगों ने बताया कि बाबूलाल अपने पिता गुलाराम की आंखों का ऑपरेशन कराने के लिए जुलाई में एक माह की छुट्टी लेकर आए थे।
पिता की आंखों का ऑरेशन कराने के बाद 29 जुलाई को ही ड्यूटी पर लौट गए थे।
शहीद जवान के बड़े भाई भैरुलाल का कहना है जैसे ही उनके लाड़के भाई के शहीद होने की खबर आई तो उनके होश उड़ गए। उनके लिए ये बड़ी मुश्किल की घड़ी थी।
शहीद बाबूलाल का साल 2005 में हवलदार के पद पर सेना की 8 जाट रेजिमेंट में सलेक्शन हुआ था।
इसके बाद 3 साल पहले ही उनका प्रमोशन हेड कॉन्स्टेबल के पद पर हुआ था।