प्राचीन मंदिर से जुड़ी लोगों की धार्मिक आस्था को देखते हुए मामला संवेदनशील लगा। इसलिए काम रुकवाकर कागजों की जांच के लिए कहा था। दो पक्षों के विवाद की परिस्थिति में काम रुकवाना
आम बात है। कागजों की जांच के लिए काम रुकवाया। मीडिया से बात करते समय मंत्री महेश जोशी ने कहा कि जो सही है उसके साथ न्याय हो।
आत्महत्या को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता। अगर काम नहीं रूकवाता और पुजारी आत्महत्या कर लेता तो फिर? बाद में पुजारी की ओर से लिखित शिकायत भी प्राप्त हुई। मृतक के परिवार ने मुझे शिकायत नहीं दी।
यही नहीं जोशी ने कहा- मौत के कारणों का पता लगना जरूरी है। आत्महत्या करने से पहले 3-4 वीडियो कौन बनवाता है। सच्चाई ठीक से पता लगनी चाहिए। एफआईआर कराना हर किसी का अधिकार है।
मैं चाहता हूं कि जल्द से जल्द उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो। इससे सच्चाई जनता के सामने आए।
जानिए क्या है पूरा मामला?
आत्महत्या करने वाला रामप्रसाद जयपुर के बीच चांदी की टकसाल व काले हनुमान मंदिर के पास रहता था। और यहां से करीब 200 मीटर दूर ही उसकी जमीन है। जिसे लेकर सारा विवाद चल रहा था।
दरअसल, मृतक खुद की जमीन पर मकान बनाना चाहता था। मृतक रामप्रसाद का आरोप है कि महेश जोशी सहित कई लोग उन्हें मकान बनाने के लिए बार-बार रोकते थे।
जमीन के सभी डॉक्युमेंट होने के बाद भी उसके घर के बाहर गार्ड लगा दिए थे ताकि काम नहीं करा सके।
जानकारी के मुताबिक राम प्रसाद की दादी 15 अप्रैल को महेश जोशी से मिली, लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की। इससे परेशान होकर राम प्रसाद ने 17 अप्रैल को सुबह फांसी लगा ली थी।