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राजनीति

दिग्गज जाट नेता ज्योति मिर्धा भाजपा में शामिल, जाट समुदाय वोटर्स बैंक में BJP की सेंध

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चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए ज्योति मिर्धा का जाना भारी सियासी नुकसान माना जा रहा है वहीं, भाजपा में उनकी एक जाट चेहरे के तौर पर बड़ी एंट्री मानी जा रही है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए ज्योति मिर्धा का जाना भारी सियासी नुकसान माना जा रहा है वहीं, भाजपा में उनकी एक जाट चेहरे के तौर पर बड़ी एंट्री मानी जा रही है।
jat leader jyoti mirdha joins bjp before rajasthan election 2023
Jyoti Mirdha Joins BJP

जयपुर | Jyoti Mirdha Joins BJP: राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठकों और उम्मीदवारों के नामों को लेकर चल रही माथापच्ची के बीच पार्टी को बड़ा झटका लगा है। 

चुनावों से पहले आज सोमवार को पार्टी के लिए जबरदस्त सियासी भूचाल आया है। 

पश्चिमी राजस्थान में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती और पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने आज भाजपा का दामन थाम लिया है। ज्योति मिर्धा ने आज नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी ज्वाइन कर ली। इस दौरान भाजपा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह और प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी मौजूद रहे।

जहां चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए ज्योति मिर्धा का जाना भारी सियासी नुकसान माना जा रहा है वहीं, भाजपा में उनकी एक जाट चेहरे के तौर पर बड़ी एंट्री मानी जा रही है।

भाजपा ने चुनावों से पहले जाट बाहुल्य नागौर बेल्ट में के लिए यह जबरदस्त दांव खेला है। ज्योति के बीजेपी में जाने के बाद जाट वोटर्स को साधने में बीजेपी को आसानी होगी।

भाजपा इन्हें हनुमान बेनीवाल के विकल्प के तौर पर देख रही है। 2009 में नागौर से सांसद रही ज्योति  मिर्धा को 2014 में बीजेपी के सीआर चौधरी ने और 2019 में एनडीए की तरफ से प्रत्याशी रहें हनुमान बेनीवाल ने हराया था।

इस बार भाजपा  नागौर सीट पर गठबंधन से इंकार कर चुकी है। ऐसे में यह पहले ही माना जा रहा था कि भाजपा नागौर से किसी बड़े चेहरे को शामिल कर सकती है।

दादा नाथूराम मिर्धा दिग्गज नेता और 6 बार सांसद रहे

ज्योति के दादा नाथूराम मिर्धा कांग्रेस के बड़े दिग्गज नेता रहे हैं। उनका मारवाड़ से लेकर पूरे प्रदेश में जोरदार दबदबा रहा। किसान नेतृत्व में मिर्धा की भागीदारी उल्लेखनीय थी। उन्होंने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1952 में मेड़ता सिटी निर्वाचन क्षेत्र से भारी बहुमत से जीता। अपने पूरे करियर के दौरान, उन्होंने राजस्थान विधान सभा और लोकसभा में सेवा की।

उनकी पोती ज्योति मिर्धा की भी राजनीति में गहरी पकड़ है। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और नागौर से जीतकर लोकसभा तक पहुंची। 

ज्योति मिर्धा नागौर से 2009 में सांसद रही हैं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हनुमान बेनीवाल से हार का सामना करना पड़ा। 

संसद कार्यकाल के दौरान वे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसदीय स्थायी समिति और महिला सशक्तिकरण समिति की भी सदस्य रहीं। 

26 जुलाई 1972 को जन्मी ज्योति मिर्धा के पिता राम प्रकाश मिर्धा और मां वीणा मिर्धा हैं।

ज्योति ने क्यों ज्वाइन की भाजपा ?

कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का कमल खिलाने का संकल्प लेने वाली दिग्गज नेता ज्योति मिर्धा ने भाजपा ज्वाइन करने के बाद कहा कि 2014 के बाद देश और प्रदेश की परिस्थितियां बदली है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारे देश का गुणगान दुनिया भर में बढ़ता जा रहा है।

लेकिन इन सब के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी इसके विपरीत चली गई। कांग्रेस पार्टी में हमारी बात तक नहीं सुनी जा रही। कांग्रेस अपने लक्ष्य से भटक गई है।

राजस्थान में महिला अत्याचार, कानून व्यवस्था को लेकर अब लोग घुटन महसूस कर रहे थे। 

जिसके चलते मेरा भी मन कांग्रेस छोड़ने का होता गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में पीएम मोदी के विजन को आगे बढ़ाने का काम करूंगी और राजस्थान में मजबूत सरकार लाने के लिए अथक प्रयास करूंगी। 

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