अगर अब सीएम अशोक गहलोत ने किरोड़ी लाल मीणा की ये मांग मान ली तो उन अभ्यर्थियों का क्या होगा जो यहां तक पहुंचे हैं। उनकी मेहनत पर तो पानी फिर जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, ऐसे अभ्यर्थी भी है जो अपनी पूरी मेहनत के बावजूद इस लेवल तक नहीं पहुंच पाए है और उनका भी मानना है कि अगर परीक्षा में अनियमितताएं हुई हैं तो इसे रोकना ही चाहिए।
सांसद मीणा ने रविवार को भाजपा मुख्यालय पर प्रेस वार्ता में अनियमितताएं होने का आरोप लगाते हुए साक्षात्कार को रोकने की मांग की है और कहा कि अगर सरकार ऐसा करती है तो ये युवा अभ्यार्थियों के साथ धोखा होगा।
सरकार को आरएएस भर्ती परीक्षा 2018 और 2021 की सीबीआई से जांच करानी चाहिए।
मीणा का आरोप है कि आरपीएसएसी चेयरमैन ने ओटीएस से सेवानिवृत्त एक व्यक्ति को इसका हेड कार्डिनेटर बनाया।
इनके पास मुख्य परीक्षा के पेपर तृतीय लोक प्रशासन विषय के यूनिट 2 की जांच करवाने की जिम्मेदारी थी।
उन्होंने कहा कि यह यूनिट 65 अंक की थी, लेकिन हेड कार्डिनेटर ने इसकी जांच विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के बजाय निजी महाविद्यालयों के अनुभवनहीन शिक्षकों से करवाई।
रीट में भी निजी लोगों को शामिल किया गया था।
इस वजह से वहां भी गड़बड़ हुई, जिसका खमियाजा युवाओं को उठाना पड़ा।
गौरतलब है कि, सांसद किरोड़ी लाल मीणा इससे पहले भी राजस्थान में हुए पेपर लीक मामले को लेकर गहलोत सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर चुके हैं।